10 मिनट डिलीवरी हटने के बाद भी गिग वर्कर्स पर तेज काम का दबाव बरकरार*
क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा ‘10 मिनट में डिलीवरी’ के वादे को हटाने की कथित घोषणा का गिग वर्कर्स की जिंदगी पर फिलहाल खास असर नहीं दिख रहा है। डिलीवरी एजेंट्स का कहना है कि उनकी कमाई अब भी ज्यादा डिलीवरी और इंसेंटिव पर निर्भर है, जिससे तेज काम करने का दबाव बना हुआ है। गिग वर्कर्स के अनुसार न्यूनतम वेतन तय नहीं है और प्रति डिलीवरी भुगतान कम है। इंसेंटिव सिस्टम ही उन्हें तेज और जोखिमभरी डिलीवरी के लिए मजबूर करता है। एजेंट्स का कहना है कि उन्हें इस बदलाव को लेकर कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। वहीं, सरकार ने गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 10 मिनट की अनिवार्य डिलीवरी डेडलाइन खत्म करने का निर्देश दिया है, लेकिन वर्कर्स का कहना है कि सुरक्षित और तय भुगतान व्यवस्था बने बिना हालात नहीं बदलेंगे।






