*झगड़ा करना भारत का स्वभाव नहीं, राष्ट्रीयता का हमारा विचार पश्चिम से अलग : मोहन भागवत*
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि विवाद करना भारत की परंपरा नहीं, बल्कि मिल-जुलकर रहना और भाईचारा बढ़ाना देश का स्वभाव है। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्र और राष्ट्रीयता का विचार पश्चिमी अवधारणा से बिल्कुल अलग है। भागवत ने कहा कि पश्चिमी देशों में विचारों पर संघर्ष होता है, जबकि भारत में विविधता के साथ सहअस्तित्व की परंपरा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत “राष्ट्रवाद” शब्द से दूर रहता है और “राष्ट्रीयता” का प्रयोग करता है क्योंकि अत्यधिक राष्ट्रवाद दुनिया में संघर्ष का कारण बना है। भागवत ने हाल ही में यह भी कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि इसकी सभ्यता स्वयं इसे व्यक्त करती है। उनके अनुसार “जो भारत पर गर्व करता है वह हिंदू है” और हिंदू एक धार्मिक नहीं बल्कि सभ्यतागत पहचान है।






