G20 शिखर सम्मेलन में रूस–यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर मतभेद तेज*

G20 शिखर सम्मेलन में रूस–यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर मतभेद तेज*
दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जारी G20 शिखर सम्मेलन में रूस–यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर गंभीर मतभेद सामने आए। अमेरिका की प्रस्तावित शांति योजना, जिसमें रूस की कुछ मांगों—डोनबास क्षेत्र के हिस्से सौंपने, यूक्रेन की सैन्य क्षमता सीमित करने और नाटो में शामिल होने की इच्छा छोड़ने—जैसी शर्तें शामिल हैं, को पश्चिमी देशों ने कड़े शब्दों में खारिज किया है। अमेरिका ने यूक्रेन को गुरुवार तक जवाब देने की समयसीमा दी है। यूरोपीय देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मसौदा केवल “काम करने योग्य आधार” है, पर सीमाएँ बलपूर्वक नहीं बदली जा सकतीं। इस बयान पर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान व अन्य यूरोपीय देशों ने हस्ताक्षर किए। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने यूक्रेन की सैन्य क्षमता सीमित करने के प्रस्ताव को चिंताजनक बताया और कहा कि सुरक्षा के लिए यूक्रेन का सक्षम रहना जरूरी है। इस मुद्दे पर उन्होंने ट्रंप और जेलेंस्की से भी बातचीत की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने G20 की दिशा को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान किए बिना शांति संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए G20 को दोबारा एकजुट होना होगा। इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनुपस्थिति, साथ ही रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के न आने से शिखर सम्मेलन की प्रभावशीलता पर सवाल उठे, हालांकि मेजबान राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने G20 को वैश्विक सहयोग के लिए अभी भी महत्वपूर्ण बताया।

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