मध्य प्रदेश भोपाल . 20 अफसरों की स्पेशल टीम व्यापमं घोटाले की जांच नए सिरे से कर रही है

मध्य प्रदेश भोपाल
. 20 अफसरों की स्पेशल टीम व्यापमं घोटाले की जांच नए सिरे से कर रही है। अभी तक सामने आईं 70 से 80 गंभीर शिकायतों पर नई एफआइआर की दर्ज की जाएंगी। इससे कई बड़े नेता और अफसरों के नाम इस जांच के दायरे में आ सकते हैं, जो पहले सियासी दांव-पेंच के चलते छूट गए थे। कमलनाथ सरकार ने इसके लिए एसटीएफ को तीन महीने की मोहलत दी है। कमलनाथ सरकार का मानना है कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने नेताओं के नाम इस घोटाले में होने के कारण जांच को दबा दिया था। इसमें तथ्यों की भी जमकर हेरा-फेरी की गई थी। – रोज खंगाल रहे फाइलें पिछले दस दिन से एसटीएफ एसपी राजेश भदौरिया के नेतृत्व में जांच हो रही है। हर दिन फाइलों को तेजी से खंगाला जा रहा है। इसमें उन 197 शिकायतों को जांच के दायरे में लिया गया है, जो पहले रफा-दफा कर दी गई थीं। विधानसभा सत्र के दौरान व्यापमं घोटाले को कांग्रेस विधायकों ने फिर उठाया था, इसलिए मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर गृहमंत्री बाला बच्चन ने एसटीएफ की बैठक लेकर जांच नए सिरे से करने का रोडमैप दिया है। – 35 पर हंगामा, अब 80 एफआइआर और होंगी व्यापमं घोटाले में 2013 से 2015 के बीच 35 एफआइआर की गई थी। इसकी पूरे देश में चर्चा हुई और हंगामा मच गया था। अब इससे दोगुने से ज्यादा मामले और सामने आने की संभावना है। क्योंकि, 197 शिकायतों की जांच में करीब 70 से 80 नई एफआइआर की स्थिति बन रही है। इतनी एफआइआर होने पर करीब 500 लोगों को और आरोपी बनाया जाएगा। इनमें कई रसूखदार नेता और अफसर हो सकते। – इनके नाम आए सामने जिन शिकायतों में एफआइआर की जाना है, उनमें पिछली शिवराज सरकार के कई मंत्री, आइएएस और आइपीएस अफसरों के नाम सामने आए हैं। पीएमटी 2008 से 2011 के साथ डीमेट और प्रीपीजी में हुई गड़बडिय़ों की शिकायतों में सबसे पहले एफआइआर दर्ज होगी। एसटीएफ के अधिकारी सीबीआई की जांच में किसी तरह का हस्ताक्षेप नहीं करेंगे।

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