साधु और श्रावक दोनों भूल करे तो संघ सुधारे : हार्दिक हुंडीया

साधु और श्रावक दोनों भूल करे तो संघ सुधारे : हार्दिक हुंडीया


प्रसिद्ध जैनाचार्य हितेश चंद्र को राष्ट्रीय संत की पदवी की घोषणा ।

मंगल प्रभात लोढ़ा , हार्दिक हुंडीया और पृथ्वीराज कोठारी का सम्मान

साधु भूल करे तो श्रावक सुधारे और श्रावक भूल करे तो साधु सुधारे, लेकिन दोनों भूल करे तो कौन सुधारे ? ये सवाल का जवाब मुजे तीन थॉय के गच्छाधिपति परम पूज्य हितेश चंद्र विजय जी महाराज के कमाठी पूरा चातुर्मास के प्रवेश में मिला । ये बात कहते हुये जैन समाज के अग्रणी हार्दिक हुंडिया ने बताया कि इनका जवाब संघ है । जैन धर्म में संघ महान है । इनकी रचना तीन लोक के नाथ देवाधिदेव परमात्मा भगवान महावीर स्वामीजी ने की थी । परम कृपालु परमात्मा के अनमोल संदेश सवी जीव करू शासन रशी की उत्कृष्ट भावना भाने वाले हितेश चंद्र विजय , निलेश चंद्र विजय अन्य मुनि महाराज , साध्वीजी महाराज चातुर्मास के लिये पधारे है । कमाठीपुरा संघ ने भव्य चातुर्मास प्रवेश कराया । हार्दिक हुंडिया ने कहा कि चार महीना धर्म ध्यान करके पुण्य कमाने का अनमोल अवसर है । हितेश विजय जी के शिष्यों में धर्म प्रति जो खुमारी है वो वंदनीय है । नीलेश चंद्र विजय इनकी अनमोल पहचान है । धर्म में कहा भी अन्याय होता है तो निलेश चंद्र विजय वहाँ पहोच के आवाज़ उठाते है । हार्दिक हुंडीया ने कहा की ख़ुद की आत्मा के कल्याण के साथ साथ हमारी आत्मा का भी कल्याण करने वाले , जिनके नाम में भी सभी का हीत है , ईश्वर के आराधक भी है ऐसे महान संत को राष्ट्रीय संत की पदवी जल्द गाजे बाजे के साथ सकल संघ की हाजरी में दी जायेगी । महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा , मोहन खेड़ा ट्रस्ट के अग्रणी सुजानमल शेठ , पृथ्वीराज कोठारी , हार्दिक हुंडिया का सम्मान किया गया । डीसा के प्रसिद्ध बेंड अजंता बेंड , संगीत कार नरेंद्र वाणी गोता ने भक्ति के साथ संचालन भी किया था । रमेश शाह , चंपालाल वर्धन , मंजू लोढ़ा और देश के कई राज्यो से भक्तों ने चातुर्मास प्रवेश में हाजरी दी थी ।

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