संस्कारों से संस्कृति बनती है, संस्कृति से संस्कारीत श्रेष्ठ समाज बनता है: कोडवानी
सिन्धी पंच मध्यस्थता व भारतीय सिन्धू सभा के संयुक्त तत्वावधान में “समाज कि दशा व दिशा” पर एक परिचर्चा लोहा मंडी स्थित मध्यस्थता केंद्र पर सम्पन्न हुई।
विगत दिनों विभत्स घटित घटना ने समाजिक ढांचे व पारिवारिक विघटन कि परिणति का परिणाम सामने लाया है। सर्वप्रथम मृतक विमान दुर्घटना व राजा अग्निहोत्री को श्रद्धांजलि दि ।
इन्दौर में सिन्धी समाज लगभग 10 करोड़ रुपए वार्षिक पर्माथिक कार्यो पर खर्च कर रहा है। परिणाम सुखद नहीं है। चारों वैदो का मुल तत्व भाषा -भूषा -भोजन- भजन ( खायण, पायण, गायण, गालाण ) से दुर होकर पाश्चात्य क्रिया कलापों में लिप्त होता जा रहा है। खोता व्यापार, शिक्षा कि प्रणर्विता सूची में नदारता, पहनावे व भाषा कि लुप्तता समाज के सामने प्रश्न वाचक बन गया है। विषय प्रवर्तन करते किशोर कोडवानी ने परिचर्चा प्रारम्भ कि । परिचर्चा में अजय शिवानी, ईश्वर हिन्दूजा, लक्ष्मीचंद जगवानी, दिलीप माटा, द्रोपती रिजवानी, नरेश फुदवानी, प्रकाश लालवानी के अतिरिक्त वडी संख्या में युवा व महिलाओं ने विचार साझा किए।
इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा माधव हासानी की पदोन्नति आप मध्यस्थता के विशेष पेन्लिस्ट है, संजय वर्मा व सुरेश फेरवानी द्वारा केंद्र संचालन हेतु 2.5, 2.5 लाख वार्षिक आर्थिक दान के लिए सम्मान किया गया।






