महाकाल-पशुपतिनाथ, उन्होंने भेद नहीं किया तो उनके दर्शन में भेदभाव क्यों

*महाकाल-पशुपतिनाथ, उन्होंने भेद नहीं किया तो उनके दर्शन में भेदभाव क्यों ?*

उज्जैन: एक बार फिर महाकालेश्वर मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। मंगलवार को मुंबई की एक ट्रैवल ब्लॉगर और श्रद्धालु नैना ने मंदिर में वीआईपी संस्कृति और सुरक्षाकर्मियों के बर्ताव को लेकर अपना दर्द साझा किया। नैना अपने पति अमित के साथ बाइक से भारत भ्रमण पर निकली हैं। इस दौरान वे उज्जैन पहुंचे और सुबह 5:30 बजे दर्शन के लिए लाइन में लग गए। करीब दो घंटे बाद, सुबह 7:30 बजे उनका नंबर आया।

नैना ने बताया कि जब वे लाइन में थी और हाथ में फोन था, तब एक महिला सुरक्षाकर्मी ने उन्हें डांटना शुरू कर दिया। जब नैना ने विरोध किया, तो एक पुरुष गार्ड ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। वहीं दूसरी ओर वीआईपी लाइन में लोग आराम से वीडियो बना रहे थे, लेकिन आम श्रद्धालुओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा था।

वीडियो पोस्ट पर भड़का जन आक्रोश

नैना ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक वीडियो ब्लॉग साझा किया, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया — “महाकाल को पशुपतिनाथ कहा जाता है, जो जीव-जंतु और मानव में भेद नहीं करते, फिर उनके दर्शन में इतना भेदभाव क्यों?” उन्होंने पूछा कि “किसे दर्शन की इजाजत मिलेगी और किसे नहीं, इसका फैसला कौन करेगा?”

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूज़र्स ने मंदिरों में फैल रही वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए और इसे सुधारने की मांग की।

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