9 अप्रैल को “विश्व नवकार महामंत्र दिवस”पर विशेष लेख
नवकार महामंत्र: जैन धर्म की आत्मिक शक्ति का मूल स्रोत
— एक आध्यात्मिक चिंतन
जैन धर्म के महान तीर्थंकरों की वाणी में सबसे पहला, सबसे पवित्र और सर्वश्रेष्ठ मंत्र है — नवकार महामंत्र। इसे “णमोकार मंत्र” या “नवकार मंत्र” भी कहा जाता है। यह कोई साधारण मंत्र नहीं, बल्कि जैन धर्म की आत्मिक परंपरा का मूल स्तंभ है — जिसकी कोई जाति, पंथ, या भगवान विशेष से सीमित पहचान नहीं है। यह सभी सिद्ध आत्माओं को नमन करने का, समर्पण का, और आत्मशुद्धि का महामार्ग है।
नवकार महामंत्र का स्वरूप:
णमो अरिहंताणं।
णमो सिद्धाणं।
णमो आयरियाणं।
णमो उवज्झायाणं।
णमो लोए सव्वसाहूणं।
— एसो पंचणमोक्काऱो, सव्वपावप्पणासणो।
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं॥
इस मंत्र में हम पाँच परमेष्ठियों को नमस्कार करते हैं:
अरिहंत – जिन्होंने सारे राग-द्वेष को जीत लिया है।
सिद्ध – जो कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर चुके हैं।
आचार्य – जो धार्मिक परंपराओं का संचालन करते हैं।
उपाध्याय – जो धर्म का अध्ययन और प्रचार करते हैं।
साधु-साध्वी – जो आत्मकल्याण के पथ पर चल रहे हैं।
नवकार का महत्व:
यह किसी देवता की स्तुति नहीं है, बल्कि यह उस गुण की वंदना है जो किसी भी आत्मा को सिद्ध बना सकता है।
यह मंत्र कर्मों के नाश का कारण है। जैसा कि मंत्र में आता है — “सव्वपावप्पणासणो”, अर्थात सभी पापों का नाश करने वाला।
“पढमं हवइ मंगलं” — यह सभी मंगलों में सर्वोत्तम मंगल है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नवकार:
जैसा कि आज के विज्ञान युग में हर बात को तर्क और प्रमाण से समझा जाता है, नवकार महामंत्र की ध्वनि और इसकी उच्चारण पद्धति का हमारे चित्त और चेतना पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसकी ध्वनि-तरंगें हमारे मस्तिष्क की तरंगों को शांत करती हैं, चिंता व तनाव को दूर कर मानसिक शांति देती हैं।
हर दिन की शुरुआत नवकार से क्यों?
जब कोई व्यक्ति दिन की शुरुआत नवकार मंत्र से करता है, तो वह अपने भीतर विनय, संयम, नम्रता, और शुद्धि का भाव लेकर आगे बढ़ता है। यह न केवल आत्मिक बल देता है, बल्कि जीवन के संघर्षों को सहजता से सहने की क्षमता भी देता है।
संपूर्ण मानवता के लिए संदेश:
नवकार महामंत्र की सबसे सुंदर बात यह है कि यह किसी धार्मिक सीमा में बँधा नहीं है। यह सबके लिए है — क्योंकि यह आत्मा की शुद्धता, सद्गुणों और मुक्ति की कामना करता है। यह एक ऐसा मार्ग दिखाता है, जहाँ व्यक्ति स्वयं की आत्मा को पहचानता है, और दूसरों की आत्मा का सम्मान करता है।
अंत में यही निवेदन है:
आइए, हम इस नवकार महामंत्र को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएँ। केवल बोलने तक सीमित न रहें, बल्कि इसके भावों को जीवन में उतारें — तभी हम सच्चे अर्थों में आत्मिक प्रगति की ओर अग्रसर होंगे।
इंदौर में भी-
दिनांक 9 अप्रैल को जीतो के द्वारा पूरे विश्व में इसका आयोजन सुबह 8 से 9.30 किया जा रहा जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां आनलाइन जुड़ेंगी ।इंदौर में यह आयोजन जीएसआईटीएस के ग्राउंड में टू वे स्क्रीन के साथ संपन्न होगा जिसमें इंदौर शहर के समग्र समाज के लोगों की सहभागिता होगी।






