राजबाड़ा से अटाला बाजार : रिमूवल दल की मौजूदगी में अतिक्रमण का मेला।

*राजबाड़ा से अटाला बाजार : रिमूवल दल की मौजूदगी में अतिक्रमण का मेला*।
*रविवार, दोपहर 3:30 बजे।*
शहर का हृदय स्थल राजबाड़ा। मौसम में उमस, सड़कों पर जनसैलाब और बाजार में खरीदारी का शोर। राजबाड़ा से अटाला बाजार की ओर कदम बढ़ते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी मेले में प्रवेश कर लिया हो। महिलाओं, युवतियों और ग्राहकों की भारी भीड़ के बीच फुटपाथों पर अनगिनत दुकानें सजी हुई हैं। पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित मार्ग मानो कहीं गुम हो चुका है।
हैरानी की बात यह कि मौके पर नगर निगम का रिमूवल दस्ता भी मौजूद है। निगम की गाड़ी खड़ी है, 15 से अधिक कर्मचारी और प्रहरी ड्यूटी पर तैनात हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं जैसे अतिक्रमण हटाने नहीं, बल्कि उसकी निगरानी और संरक्षण के लिए व्यवस्था की गई हो।
राजबाड़ा स्थित गोपाल मंदिर की ओर वाले द्वार के पास नगर निगम के सुपरवाइजर शुभम गर्दे मोबाइल पर रील देखने में व्यस्त दिखाई देते हैं। दूसरी ओर रिमूवल दल के तथाकथित “अर्थ संग्रह सेनानी” सद्दाम अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में पूरी तत्परता दिखाते नजर आते हैं।
अटाला बाजार से निहालपुरा जाने वाला मार्ग लोगों की भीड़ से अटा पड़ा है। दुकानदारों की पुकार, ग्राहकों की आवाजाही और फुटपाथों पर फैले अस्थायी कारोबार के बीच यातायात और पैदल आवागमन दोनों संघर्ष करते दिखाई देते हैं।
पीपली बाजार क्षेत्र में नगर निगम का विशाल ट्राला खड़ा है, लेकिन उसके आसपास फैला अतिक्रमण यह प्रश्न खड़ा करता है कि आखिर यह ट्राला कार्रवाई का प्रतीक है या संरक्षण का? फुटपाथों पर पसरी दुकानें और उनके बीच से रास्ता खोजते नागरिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आईना दिखा रहे हैं।
नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी रिमूवल टीम की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वास्तविक प्रभावशीलता का गंभीरता से आकलन करना होगा। केवल वाहनों और कर्मचारियों की मौजूदगी से अतिक्रमण नहीं हटता, उसके लिए इच्छाशक्ति, सतत कार्रवाई और जवाबदेही भी आवश्यक है। अन्यथा जनता के बीच यह संदेश जाता है कि रिमूवल दल की मौजूदगी और अतिक्रमण का विस्तार एक साथ चल रहे हैं।
*प्रश्न यही है जब रिमूवल दस्ता मौके पर मौजूद था, तब फुटपाथों पर कब्जे और सड़कों पर अव्यवस्था क्यों बनी रही?*
इसका उत्तर नगर निगम के जिम्मेदारों को देना ही होगा।

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