*श्वेताबर जैन महासंघ न्यास के चुनाव में पंथ गच्छवादी बनाकर परिणाम पाने की होड़*
इंदौर। श्वेताबर जैन एकता के उद्देश्य से बना महासंघ न्यास अब काफी राजनीतिक पैतरेबाजी की मकड़ जाल में फंस गया है । चुनाव 16 जनवरी को होना है और मतदाता को रिझाने में अब पंथ-गच्छवाद ओर ओसवाल – छोटेसाथ साजना की बात हो रही है ।
शीतलहर के इस दौर में महासंघ के 4 न्यासी पद के चुनाव के गर्मी जैन समाज मे एहसास हो रहा है । 13 उम्मीदवार ओर उनके समर्थक खूब जोर लगा रहे है ।
उम्मीदवारों की सबसे जटिल स्थिति यह है कि सम्पन्न समाज और पढालिखा मतदाता है लेकिन वहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए उसे अपने गच्छ पंथ गुरू आमना का सहारा लेना पड़ रहा है । बड़ेसाथ ओसवाल ओर छोटे साथ साजना समुदाय के वोट की ओर चुनाव मोड़ दिया है ।
न्यास के नए अध्यक्ष के 2 दावेदार क्रमशः विजय मेहता ओर प्रकाश भटेवरा है। जिनके वजह से समाज समन्वय न्यासी चयन के जगह अब चुनाव के हवन का सामना कर रहा है ।
विजय मेहता स्वयं अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते है और प्रकाश भटेवरा भी अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते है । वर्तमान 12 में 8 न्यासी है जिनमे 4 पर प्रकाश भटेवरा समर्थक है । 3 विजय मेहता के है । 4 नए का चुनाव हो रहा है । इस अध्यक्ष पद पाने की होड़ ने समाज को एक बार फिर वर्गीकृत कर दिया है । समाज के वढीलो कि समाज समन्वय की नींव हिल गई है।
13 उम्मीदवारों में स्थानकवासी आमना के जिनेवश्वर जैन , विमल तांतेड़, सुभाष विन्यायकिया, शिखर बाफ़ना ,रूपेंद्र जैन चीनू, रितेश कटकानी, पीयूष जैन, संतोष जैन मामा, है वही मंदिरमार्गीय समुदाय के शेखर गेलड़ा, पुंडरीक पालरेचा, भरत शाह, राजेश जैन युवा, अशोक जैन है । समाज के चुनाव में 1257 मतदाता है । जिसमे स्थानकवासी समाज के मतदाता बहुसंख्यक बनाये गए है । इस चुनाव में विषवमन के बाद श्वेताबर जैन समाज की एकता की नींव को खंडित होने से बचाना इन न्यासियों के लिए काँटाभरा रास्ता बन गया है ।
*उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि – कारोबारी भूमि और बोल भाषा भी कसौटी बन रहा है*
महासंघ न्यासी चुनाव में उम्मीदवार का अब तक का सार्वजनिक जीवन की भी इस दौर में मतदाता के सामने विचारणीय बना है । किस उम्मीदवार ने प्राकृतिक आपदा के दौर यानी कोरोना काल मे समाज के पीड़ित वर्ग के लिए किस तरह का काम किया । मानव सेवा के लिए कौन समाज के लोगो मे खड़ा होता है । शिक्षा के क्षेत्र में किस तरह की मदद की जाती रही है इनका भी उम्मीदवार के जीवन कार्यशैली पर आंकलन किया जा रहा है । एक उम्मीदवार की व्यवस्यायिक मानसिकता से समाज के कुछ लोगो की भूखंड में गड़बड़ियों की बात भी इस चुनाव में मुद्दा बन गई तो किसी उम्मीदवार के परिवार के आपराधिकता की संलिप्तता ओर किसी सदस्यों का जैन सोशल ग्रुपों की जैन धर्म विपरीत आचरण समर्थक हो जाना भी नफे नुकसान की कसौटी बन रहा है ।






