*मनोज मुंतसिर के बयान पर सनातन के ठेकेदार,हिन्दुराष्ट्र बनाने वाले मौन क्यो :- नारायण त्रिपाठी
मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने आधुनिक राइटर मनोज मुंतसिर के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि राम के नामपर अंतरराष्ट्रीय राजनीति होती है। हमारे राम और रामायण के आधार पर जो धर्मग्रंथ है उसी पर आधारित है चाहे राजनीति हो सामाजिक जिम्मेवारी हो,कार्य हो या घर परिवार के रहन सहन की बात हो सबकुछ इन धर्मग्रन्थो के आदर्श पर आधारित है।
रामभक्त हनुमान जी को कलयुग का देवता माना गया है प्रभू श्रीराम ने कलयुग की जिम्मेवारी श्री हनुमान जी को सौंपी थी। यदि हम हिन्दू धर्म और ग्रंथो का सम्मान करते है तो हमे रामायण गीता को मानना पड़ेगा। गोस्वामी तुलसीदास जी को ओल्ड राइटर और अपने आप को आधुनिक राइटर बताने वाले मनोज मुंतसिर के फ़िल्म आदिपुरुष के डायलॉग का विरोध मैने महीनों पूर्व किया था पत्र भी कई जगह लिखे थे लेकिन उस दौरान लोगो ने मुझे हास्य का पात्र बनाया।
विधायक नारायण त्रिपाठी ने उन धर्म गुरुओं को आवाज लगाते पूंछा है कि आज वे कहा है जो सनातन के ठेकेदार बने है हिंदुस्तान को हिन्दुराष्ट्र बनाने का संकल्प लिए घूमते है आज उनकी क्या मजबूरी है जो मनोज मुंतसिर मामले में मूक दर्शक बने बैठे है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि मै उन तमाम धर्मगुरुओं से आग्रह निवेदन करता हु कि संत समाज का राजनीति करना अनुचित नही पर आज राजनीति नही है यह सनातन धर्म हिन्दू समाज के आस्था का मामला है रामायण गीता हनुमान जी के सम्मान का मामला है।
मै अपने चित्रकूट के तमाम साधू संत हिंदुस्तान के तमाम धर्म गुरुओं से प्रार्थना करता हु कि मनोज मुंतसिर जैसे तुच्छ लोग हमारी गीता रामायण का ऐसा व्याख्यान करेंगे तो यह बर्दास्त के योग्य नही होगा। मै कोई बड़ी प्रॉपर्टी वाला तो नही लेकिन घोषणा करता हु कि देश के अंदर कही भी कोई भी मनोज मुंतसिर को सामाजिक रूप से अगर 10 जूता मारेगा तो मै उसे अपनी एक माह की तनख्वाह जो एक सवा लाख मिलती है इनाम में दूंगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कृत्य किसी अन्य समाज मे हुआ होता तो अब तक सर कलम करने की बात सामने आ गयी होती। इस मामले में आखिर हमारे धर्मगुरु बेबस और लाचार क्यो बैठे है।
विधायक त्रिपाठी ने कहा कि रामायण में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि “अनजाने को क्षमा गोसाई” और हमारे संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर जी ने भी संविधान में यह वर्णित किया है कि अगर अनजाने में धोखे से कोई ऐसी घटना घट गई जिसमें व्यक्ति की मौत भी हो गयी तो वह 302 का नही 304 का अपराध माना जायेगा। उन्होंने कहा कि रावण जैसे महा विद्वान महा पराक्रमी को भी राक्षस की उपाधि दी गयी। मनोज मुंतसिर पंडित आदमी है उसे भी अपनी विद्वता पर बहुत घमंड है जो बार बार अपनी बात में दोहरा रहा है कि उसने कोई गलत काम नही किया यह नए और पुराने अध्यन का मामला है इसलिए मै अपनी बात को एकबार पुनः दोहराता हु कि इस कलयुगी विद्वान को जो भी दस जूते मारेगा उसे मै अपनी एक माह की तनख्वाह जो भी एक सवा लाख मिलती है इनाम स्वरूप दूंगा।

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