*मुख्यमंत्री की सहानुभूति की असलियत का फंडा फूटा*
*कोरोना मैं पिता को गंवाने वाले बच्चे परेशान*
*बच्चों की मां नौकरी और मदद के लिए गई तो मुख्यमंत्री से मिलने से रोका, भाजपा कार्यालय आने की दावत दी*
*इंदौर*। कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कोरोना की त्रासदी से पीड़ित बच्चों के प्रति जताई जा रही सहानुभूति की असलियत का भंडा फूट गया है । इस त्रासदी में अपने पिता को खोने वाले बच्चे परेशान हैं । इन बच्चों की मां जब सरकारी मदद और अपने लिए नौकरी मांगने गई तो उन्हें कुछ नहीं मिला बल्कि कहा गया कि भाजपा के कार्यालय में आइए, विचार करेंगे ।
विधायक शुक्ला ने कहा कि कल नरसिंह वाटिका पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण अपने माता – पिता को खोने वाले बच्चों के साथ मुलाकात की गई । इन बच्चों को भाजपा ने राजनीति का मोहरा बना लिया है । अभी 1 दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री इन बच्चों से बात करते हुए मदद का वादा करते हैं तो दूसरे दिन मुख्यमंत्री के लिए एक बार फिर इन सारे बच्चों को इकट्ठा कर लिया जाता है । इस मौके पर नरसिंह वाटिका में बड़ी संख्या में वे बच्चे भी पहुंचे थे, जिनके पिता की कोरोना के संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई । इन बच्चों को कहीं से कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही है । इन बच्चों की माता हालात का मुकाबला करने में अपने आपको विवश पा रही हैं ।
विधायक शुक्ला ने कहा कि जब इन बच्चों की माताओं के द्वारा मुख्यमंत्री से मुलाकात करने और स्वयं के परिवार के लालन पालन के लिए नौकरी देने के लिए आवाज उठाई जाने लगी तो प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया । इन महिलाओं से कहा गया कि आपको मुख्यमंत्री से मुलाकात का टाइम नहीं दिया गया है इसलिए मुलाकात नहीं हो सकती । वहीं दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं ने इन महिलाओं से कहा कि जब आपको समस्या है तो क्या आप भाजपा कार्यालय आई हैं ? अब आप हमारे कार्यालय आइए । हम आपकी समस्या समझेंगे , विचार करेंगे, फिर देखा जाएगा ।
विधायक शुक्ला ने कहा कि यह सारे भाजपा नेताओं के कथन इन महिलाओं के दुख दर्द पर राजनीति की रोटी सेंकने का स्पष्ट प्रयास नजर आते हैं । हालात के आगे बेबस महिलाएं रो तक पड़ी लेकिन प्रशासन के अधिकारियों और भाजपा के नेताओं का मन नहीं पसीजा । बच्चों को अपने होने की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री ने बमुश्किल 1 मिनट में इन महिलाओं के हाथ से कागज ले लिया और आगे बढ़ गए । इनके दुख दर्द को सुनने के लिए उनके पास समय नहीं था । इन लोगों की मदद करने के लिए उनके पास प्रावधान नहीं है । इस घटना से भाजपा का और मुख्यमंत्री का स्वार्थी चेहरा उजागर हो कर सामने आ गया है ।
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