बिक्री बढ़ाने के एवज में मिलने वाले उपहारों को माना जाएगा आय, गिफ्ट देने वाली कंपनियों को काटना होगा टीडीएस

बिक्री बढ़ाने के एवज में मिलने वाले उपहारों को माना जाएगा आय, गिफ्ट देने वाली कंपनियों को काटना होगा टीडीएस*
उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए बहुत सी कंपनियां अपने वितरक, थोक और फुटकर कारोबारियों को उपहार देती हैं। इसी तरह दवा कंपनियां भी दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए डाक्टरों को अक्सर बड़े-बड़े उपहार देती हैं। कंपनियां इस खर्च को सेल्स प्रमोशन के मद में डालकर आयकर का लाभ ले लेती हैं लेकिन उपहार पाने वाला इन्हें न तो अपनी आय में शामिल करता है और न ही अपने रिटर्न में कोई जिक्र करता है। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।टैक्स डिडेक्शन एट सोर्स के नए नियमों के चलते उपहार पाने वाले को इसे अपनी आय में शामिल करना होगा। यह प्रविधान एक जुलाई, 2022 से लागू होने जा रहा है। हालांकि, 20 हजार रुपये तक के उपहार इस नियम से मुक्त रहेंगे। आयकर कानून में टीडीएस के प्रविधानों को बढ़ाते हुए धारा 194आर को जोड़ा गया है। इसके अनुसार, उपहार देने वाली कंपनी उपहार पाने वाले से 10 प्रतिशत टीडीएस वसूलेगी। टीडीएस काटने के बाद ही उपहार या कोई वस्तु दी जाएगी।इसके बाद कंपनी आयकर विभाग के टीडीएस रिटर्न में भी इसका उल्लेख करेगी और वसूली हुई राशि को जमा भी करेगी। टीडीएस रिटर्न फाइल होने से आयकर विभाग को पता चल जाएगा कि उपहार किसे दिया गया और उसकी कीमत क्या थी। उपहार पाने वाले के आयकर पोर्टल में 26एएस में यह अपने आप दिखने लगेगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट मलय गुप्ता के मुताबिक, इस नए नियम का उद्देश्य सभी प्रकार के व्यापारिक लाभों को टीडीएस के जरिये कर योग्य आय की श्रेणी में लाना है।टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने कहा कि इस नियम के आने से गिफ्ट आदि के संदर्भ में कंप्लायंस बेहतर होगा। इसमें एक तरह से उपहार देने वाली कंपनी की जिम्मेदारी तय हो गई है कि वह उपहार (20 हजार रुपये से ज्यादा के) पर टीडीएस काटकर देगी ताकि जिसे उपहार मिला है, उसकी जानकारी सरकार तक पहुंचे। यह प्रक्रिया इस संबंध में कंप्लायंस को और सुचारू बनाएगी।

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