पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने नौतपा में कुओं, बावड़ियों एवं तालाबों की सफाई को लेकर जनता से की अपील

पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने नौतपा में कुओं, बावड़ियों एवं तालाबों की सफाई को लेकर जनता से की अपील
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) द्वारा वर्षों से चलाए जा रहे समाज जागरण अभियान को जारी रखते हुए नागरिकों से नौतपा में कुओं, बावडि़यों एवं तालाबों की सफाई को लेकर अपील की है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने जारी समाज जागरण के अंतर्गत अपील करते हुए कहा कि 25 मई से नौतपा प्रारंभ हुआ है। इस दौरान सूर्य के स्नेह की गर्मी चरम पर रहेगी। उन्होंने कहा कि धरती को सुजलाम, सुफलाम बनाए रखने की दृष्टि से रची-बनी अपनी जीवन शैली के प्रयोग हम मनोयोग से अपनाए। प्रकृति और समृद्धि में सामांजस्य बना मानवता को पल्लवित पोषित करने की अपनी परंपराओं को भुलने की हम कितनी कीमत चुका रहे है!
कुएं को संभाले, कुएं हमें संभालेगा
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि सामान्यतः पर्यावरण और विकास एक-दूसरे के विरूद्ध प्रतीत होते है। एक-दूसरे के साथ चलते हुए पर्यावरण को संभालते हुए भी विकास हो सकता है, इसका उदाहरण बुरहानपुर बने। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि कुआं बहुत वैज्ञानिक है, कुआं बहुत दीर्यायु है, कुआं पीढि़यों तक साथ देता है, कुएं ने हमारा साथ नहीं छोड़ा बल्कि हमने कुओं का साथ छोड़ा है। उन्होंने कहा कि अपने समाज और क्षेत्र में कुआं सबसे आसान और सस्ता जल उपलब्ध कराने का जरिया (माध्यम) है। जलस्त्रोत के अन्य माध्यमांे में जैसे ट्यूबवेल का पानी एकदम सुख जाता है और कुओं के झीर से जल आवक क्षमता कम हो सकती है किंतु खत्म नहीं होती। कुएं में जल भंडारण की क्षमता ट्यूबवेल की अपेक्षा हजारों गुणा अधिक होती है जिसके कारण कुएं का जल कम हो सकता है किंतु खत्म नहीं होता है।
श्रीमती चिटनिस ‘‘मैं कुआ हूं पीढि़यांे से आपकी प्यास बुझा रहा हूं। आपके बुजुर्गांे की मैंने प्यास बुझाई। इन सबसे मुझे भी बहुत प्यार और सम्मान मिला। इन सबके सुख-दुख को मैंने देखा, महसूस किया और बांटा। मैं जिंदा रहना चाहता हूं। आपके बुजुर्ग कभी जुते-चप्पल पहनकर मेरे पास तक नहीं आते थे। समाज चिंता कर मुझे संभालता था। मैं कुआं हूं, कचरे का डिब्बा नहीं। आप मुझे संभालें, मैं आपको संभालूंगा। मैं आपको याद दिला दूं अपने देश मंे कई अवसरों पर कुआंे को पूजने की परंपरा युगांे से रही है। आप भले ही मुझे न पूंजे पर मुझे जिंदा रहने दें। मैं सदैव आपका साथ निभाने का वायदा करता हंू।‘‘ इस प्रकार का कुएं की मन की बात बताने वाला बोर्ड अपने-अपने कुओं के समीप लगाने का भी आग्रह किया।
ज्ञात हो कि पिछले 10-12 वर्षांे में श्रीमती चिटनिस द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में 300-400 से अधिक वर्षांे पुराने पाय-बावडि़यों एवं कुओं का उपसा, सौंदर्यीकरण एवं विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें पुर्नजीवित किया गया।


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