भोपाल। वित्त विभाग की ओर से प्रदेश के करीब 50 निगम-मंडलों की विाीय स्थिति की समीक्षा का काम पूरा कर लिया गया है। सिर्फ दो-चार निगम-मंडलों की समीक्षा का काम बाकी है। समीक्षा के दौरान निगम-मंडलों की जमा पूंजी, उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आवंटित राशि के उपयोग की स्थिति, उनके तीन साल के टर्न ओवर, निगम-मंडलों के ऑडिट की स्थिति आदि की समीक्षा की गई। सूत्रों का कहना है कि तीन साल के टर्न ओवर की समीक्षा में सामने आया कि कई निगम-मंडल घाटे में चल रहे हैं। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ऐसे ही कई निगम-मंडल उन्हें आवंटित राशि का उपयोग नहीं कर पाए हैं। यह राशि उनके बैंक खाते में पड़ी है। कुछ निगम-मंडलों द्वारा ऑडिट नहीं कराने की जानकारी भी सामने आई है। वित्त विभाग ने 54 निगम-मंडलों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने की जिमेदारी अपने उप सचिव स्तर के चार अधिकारियों को सौंपी है। समीक्षा में कुछ निगम-मंडलों के पास बड़ी मात्रा में जमा पूंजी उपलध होने की बात सामने आई है, यह राशि सरकार की संचित निधि में जमा कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ समीक्षा के दौरान सामने आईं निगम-मंडलों की कमियां दूर करने को कहा जाएगा। समीक्षा की रिपोर्ट वित्ता विभाग को सौंपी जा रही है। इसलिए कवायद कर रही सरकार दरअसल, किसान कर्जमाफी और बाढ़ से हुए फसल नुकसान की राहत राशि किसानों को प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता में है। केंद्र सरकार मप्र को आपदा राहत राशि नहीं दे रही है, इसलिए सरकार निगम- मंडलों से इसके लिए राशि की व्यवस्था करने में जुट गई है। सूत्रों का कहना है कि विा विभाग समीक्षा शुरू करने से पहले मप्र राज्य लघु वनोपज संघ से 400 करोड़ रुपए सरकार की संचित निधि में जमा कराने को कह चुका है। यह तेंदूपत्ता विक्रय से इकठ्ठी होने वाली राशि है।
सीएजी ने की थी सिफारिश
सूत्रों का कहना है कि भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने वर्ष 2017 में सार्वजनिक उपक्रमों की समीक्षा करने की सिफारिश भी की थी, जिसे देखते हुए यह बैठकें की जा रही हैं। इनमें उन संस्थाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने ऑडिट नहीं कराया है या जिनके आय-व्यय पर ऑडिट आपत्ति आई है।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पदों पर लटकी राजनीतिक नियुक्तियां
पिछले साल दिसंबर में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से अब तक निगम-मंडलों व प्राधिकरणों में नियुक्तियां नहीं की जा सकी हैं। साी निगम-मंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत अन्य राजनीतिक पद ााली पड़े हैं। कांग्रेस नेताओं को बेसब्री से नियुक्तियों का इंतजार है। हर बार जैसे ही मुयमंत्री कमलनाथ दिल्ली जाते हैं, निगम-मंडलों में नियुक्तियां जल्द होने को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। फिलहाल दिसंबर में प्रस्तावित विधानसाा के शीतकालीन सत्र से पहले निगम-मंडलों में नियुक्तियों की बात की जा रही है।
कुछ बड़े निगम जिनकी समीक्षा हुई
मप्र सड़क विकास निगम, मप्र हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम, मप्र ऊर्जा विकास निगम, नर्मदा बेसिन प्रोजेट कंपनी, मप्र विा निगम, मप्र लघु उद्योग निगम, मप्र वन विकास निगम, मप्र पुलिस आवास निगम, मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास निगम आदि।






