गले की फांस बना, सिंहस्थ रोड चौड़ीकरण* (निरुक्त भार्गव)

*गले की फांस बना, सिंहस्थ रोड चौड़ीकरण*

(निरुक्त भार्गव)

सराफा क्षेत्र स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन और चार मस्जिदों को आंशिक अथवा पूर्णत: हटाये जाने का मामला स्थानीय प्रशासन के लिए गले में हड्डी फंसने जैसा हो गया है. उज्जैन जैसे अत्यंत संवेदनशील स्थान पर पिछले 12 दिनों के दौरान तेजी से उभरे इस मसले ने राज्य सरकार के सिंहस्थ महापर्व-2028 की तैयारियों के लिए बनाये गए करोड़ों रूपए की लागत वाले रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट की पूर्णता पर ही सवालिया निशान लगा दिया है.

नगर निगम प्रशासन द्वारा ताबड़तोड़ रोड चौड़ीकरण का मुद्दा लगभग एक साल से लगातार विवादों के केंद्र में है. इसका मूल कारण सभी पार्टियों को विश्वास में नहीं लिया जाना और अनियोजित तरीकों से इन प्रोजेक्ट्स को कार्यान्वित करना रहा है. इन प्रोजेक्ट्स के चलते बड़ी संख्या में दुकानदार और मकानदार प्रभावित हुए हैं. एक लम्बे अरसे से ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमराई हुई है जिसने समूची आबादी को हलकान किया हुआ है. न केवल प्रभावित लोग, बल्कि शहर के बाशिंदे तक व्यापक सड़क चौड़ीकरण अभियान के औचित्य को समझ नहीं पा रहे हैं. लोगों के मन में सवाल है कि उज्जैन जैसी अति-प्राचीन नगरी के पुरातन वैभव और पहचान चिन्हों और स्थानों को आखिर क्यों एक-के-बाद-एक ध्वस्त किया जा रहा है.

खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन को लेकर जो ताजा विवाद सामने आया है, उसको लेकर प्रशासनिक अदूरदर्शिता की बड़ी चर्चा है. कंठाल से छत्री चौक रोड चौड़ीकरण के तहत इस मूर्ति को टंकी चौक पर विस्थापित किया जाना है और करीब एक पखवाड़े पूर्व मंदिर के पुजारी और सर्व-सम्बंधित पक्षों के बीच सहमति बन गई थी. इसी के चलते नए स्थान पर व्यवस्थित तरीके से पर्याप्त स्पेस देकर स्थाई निर्माण कर दिया गया था. इतना ही नहीं, कोई 10 दिन पहले वर्तमान मंदिर के स्ट्रक्चर को हटाने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई थी और मूर्ति के आस-पास खुदाई का कार्य भी संपादित किया गया था. इस कवायद में मूर्ति को कोई क्षति न पहुंचे और आस-पास के लोगों के आक्रोश को देखते हुए विस्थापन का कार्य रोक दिया गया जो आज भी ठंडा ही पड़ा हुआ है.

जिस तरह की जनभावनाएं सामने आई हैं और क्षेत्र के पार्षद, महापौर, विधायक और सांसद ने उनकी आड़ में रोड चौड़ीकरण से पल्ला झाड़ लिया है, स्थानीय प्रशासन तो हैरान और परेशान है ही, सरकार के अलम्बदारों के होंसले भी पस्त हो गए हैं. असल में, रोड चौड़ीकरण का मुद्दा ही अब हाशिये पर जाता दिख रहा है. स्थिति इस तरह की बन गई है कि मूर्ति को विस्थापित करने का कदम तभी सफल होगा जब मस्जिदों को हटाये जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए. और यदि, मूर्ति का विस्थापन नहीं होता और मस्जिदों को नहीं हटाया जाता, तो दूसरे रोड चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट्स को प्रभावित दुकानदार और मकानदार शायद ही सपोर्ट करें. ऐसे में सिंहस्थ की महत्वपूर्ण तैयारियों पर ग्रहण लग सकता है.

हालांकि वरिष्ठ प्रशासनिक अफसर पिछले दो-तीन दिनों से मूर्ति विस्थापन और मस्जिद हटाये जाने को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने में सक्रिय हैं, संकेत नहीं मिल रहे हैं कि अब कोई भी धार्मिक ढांचे को छेड़ा जा सकेगा. प्रमुख जनप्रतिनिधियों और भाजपा संगठन के माध्यम से विश्व हिन्दू परिषद् और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राजी करने के प्रयासों को भी झटका लगा है. दोनों ही संगठनों के मालवा क्षेत्र के प्रमुख पदाधिकारियों ने मूर्ति विस्थापन को लेकर प्रशासन और शासन के पक्ष का समर्थन करने से मना कर दिया है. उनके अनुसार धार्मिक विषय पर जनभावनाएं सर्वोच्च होती हैं और वे किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करने वाले. विहिप इस मामले में अगले दिनों में एक रैली भी निकालने वाली है जिसमें एक ज्ञापन के माध्यम से खड़े हनुमान मंदिर के मौजूदा स्थल को ही सुन्दर रूप से विकसित करने की मांग की जाएगी. 17 सितम्बर को संघ के मुखिया मोहन भागवत दो कार्यक्रमों में हिस्सा लेने उज्जैन आ रहे हैं और इसीलिए प्रशासन को कहीं से भी रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट्स पर आगे बढ़ने के लिए समर्थन नहीं मिल रहा है.

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