चेम्बूर 3-9-2026।स्वाध्याय आत्मा का दर्पण है – साध्वी निर्वाणश्री


चेम्बूर में स्वाध्याय दिवस पर विशेष आराधना के अवसर पर उपस्थित विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – भगवान महावीर ने पराक्रम व पुरुषार्थ को सर्वाधिक महत्त्व दिया। उन्होंने कहा – ‘पुरिसा! परक्कमेज्जा’ हे पुरुष तुम पराक्रम करो। भगवान ने जैसे काल, स्वभाव, नियति, कर्म और पुरुषार्थ – इन पाँच तत्त्वों के आधार पर हर घटना की व्याख्या की है। ये पाँच समवाय हर संसारी प्राणी के साथ जुड़े हुए हैं। तत्त्व की ये बातें हमें शास्त्र-अध्ययन या प्रवचन श्रवण से जानने मिलती है।
साध्वीश्री योगक्षेमप्रज्ञाजी ने अपने वक्तव्य में कहा – पर्युषण महापर्व अध्यात्म की ऊँचाइयों को छूने का पर्व है। तीर्थंकरों का चरित्र वह प्रेरणा प्रदीप है जो सघन अंधकार में भी नया प्रकाश – नया उल्लास पैदा करता है। भगवान ऋषभ की तरह भवों की यात्रा आत्म विकास की विलक्षण यात्रा है। इसका श्रवण करने से हम भी ऊर्ध्वारोहण कर सकते हैं।
साध्वी कुंदनयशाजी ने स्वाध्याय की महत्ता प्रतिपादित करते हुए स्वाध्याय की प्रेरणा दी।
साध्वी मुदितप्रज्ञाजी ने ‘श्रुत सागर लहराए’ गीत की मधुर संगीतमय प्रस्तुति दी। मंगलाचरण घाटकोपर तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र सामूहिक जप से हुआ। साध्वीश्री ने प्रारंभ में ध्यान का प्रयोग करवाया। मंच संचालन श्रीमती रीनाजी धाकड़ ने किया






