*तकनीक से स्वच्छता का अगला अध्याय लिखेगा इंदौर- महापौर*
*IIM इंदौर के साथ मिलकर स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल बनाएगा निगम*
*AI और IoT से होगी कचरा, सीवरेज और जल प्रबंधन की निगरानी,दो साल तक होगा संयुक्त शोध- महापौर*
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब स्वच्छता व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों से और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। नगर निगम और भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर मिलकर अगले दो वर्षों तक जल, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग करेंगे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई मेयर-इन-काउंसिल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
18 जून 2026 को हुई मेयर काउंसिल बैठक में स्वीकृत स्कोप ऑफ वर्क के तहत आईआईएम इंदौर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नगर निगम चरणबद्ध तरीके से शहर की स्वच्छता व्यवस्था का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। इसका उद्देश्य इंदौर के स्वच्छता मॉडल को तकनीक आधारित, अधिक प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।
*पहले चरण* (अगस्त-दिसंबर 2026) में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का वैज्ञानिक मूल्यांकन, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और परिवहन व्यवस्था की कार्यक्षमता का अध्ययन तथा उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
*दूसरे चरण* (सितंबर 2026-मार्च 2027) में सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए नए वित्तीय मॉडल तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही IoT आधारित सीवरेज मॉनिटरिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा तथा अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नवाचारों और नई तकनीकों का डेटाबेस विकसित किया जाएगा।
*तीसरे चरण* (अप्रैल-सितंबर 2027) में संस्थागत क्षमता विकास पर फोकस रहेगा। AI आधारित पूर्वानुमान और निर्णय सहायता प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतर योजना तैयार की जा सके।
*तकनीक से स्वच्छता का अगला अध्याय लिखेगा इंदौर*
*महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा* इंदौर ने स्वच्छता में लगातार देश का नेतृत्व किया है। अब हमारा लक्ष्य तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के जरिए इस मॉडल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। आईआईएम इंदौर के साथ यह साझेदारी एआई और आधारित स्मार्ट समाधान विकसित करेगी, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और टिकाऊ बनेगी। हमें विश्वास है कि यहां विकसित होने वाला मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगा।
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