अक्षय शब्द संग्राम किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति का अभियान

*अक्षय शब्द संग्राम किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति का अभियान*
समाज में विचारों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर प्रहार करना नहीं, बल्कि उन प्रवृत्तियों पर प्रश्न उठाना है जो समाज की नैतिकता, पारदर्शिता और चरित्र को कमजोर करती हैं। अक्षय शब्द संग्राम इसी सामाजिक जन-जागरण का अभियान है।
जब समाज में चरित्र, जवाबदेही और शुचिता की बात होती है, तब कुछ लोगों को यह व्यक्तिगत आक्षेप प्रतीत होने लगता है। यदि किसी लेख में किसी का नाम नहीं है, फिर भी कोई स्वयं को उससे जोड़कर आहत महसूस करता है, तो यह आत्ममंथन का विषय है। स्वस्थ समाज में प्रश्नों का उत्तर तर्क से दिया जाता है, न कि प्रश्न उठाने वालों की आवाज़ दबाकर।
दागदार छवि वाले व्यक्तियों को सम्मान और संरक्षण देने की प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। समाज को यह जानने का अधिकार है कि निर्णयों का आधार चरित्र और सेवा है या धन, प्रभाव और निजी समीकरण। यदि निष्ठावान और निष्कलंक लोगों की उपेक्षा होगी तथा विवादित चेहरों का महिमामंडन होगा, तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
यदि सामाजिक जागृति से जुड़े लेखों के कारण कुछ कथित कर्णधार असहज होकर लेखक को मंचों, समूहों या माध्यमों से दूर करने का प्रयास करते हैं, तो इससे विचार समाप्त नहीं होते। विचारों को प्रतिबंधित करने से अधिक आवश्यक है उनका तथ्य और तर्क के आधार पर उत्तर देना।
अक्षय शब्द संग्राम किसी व्यक्ति या समूह के विरोध का मंच नहीं है। इसका उद्देश्य समाज में पारदर्शिता, नैतिक नेतृत्व, चरित्रवान व्यक्तियों के सम्मान और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करना है।
समाज का भविष्य मौन से नहीं, बल्कि जागरूक संवाद से सुरक्षित होगा। धर्म की वास्तविक रक्षा तभी होगी जब पद से पहले पात्रता, प्रभाव से पहले चरित्र और धन से पहले नैतिकता को महत्व दिया जाएगा।
*अक्षय शब्द संग्राम का संकल्प है* *व्यक्ति नहीं, प्रवृत्ति बदले; विरोध नहीं, सामाजिक जागृति बढ़े।*

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