मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों पर की गई टिप्पणी निंदनीय, सार्वजनिक रूप से माफी मांगें – आनंद जैन कासलीवाल

मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों पर की गई टिप्पणी निंदनीय, सार्वजनिक रूप से माफी मांगें – आनंद जैन कासलीवाल

दिगंबर जैन समाज के प्रति भारतीय जनता पार्टी की पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सक्रिय सदस्य श्रीमती मेनका गांधी द्वारा दिए गए कथन, जिसमें उन्होंने दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोरपंख के संबंध में यह कहा कि उसके लिए मोरों की हत्या की जाती है, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, तथ्यहीन एवं जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।

जैन धर्म विश्व का सर्वाधिक अहिंसा प्रधान धर्म है। दिगंबर जैन संत अपने संपूर्ण जीवन में अहिंसा, अपरिग्रह एवं संयम का पालन करते हैं। वे अपने शरीर पर वस्त्र तक धारण नहीं करते, ऐसे में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वे किसी जीव की हत्या से प्राप्त वस्तु का उपयोग करेंगे।

वास्तविकता यह है कि दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोरपंख प्राकृतिक रूप से झड़ने वाले पंखों को एकत्रित कर बनाए जाते हैं। इनमें किसी भी प्रकार की हिंसा या मोर की हत्या का कोई संबंध नहीं होता। यदि कहीं मोरों की हत्या कर उनके पंखों का अवैध व्यापार किया जाता है तो उस पर कठोर कार्रवाई होना चाहिए, किंतु इसका दोष जैन संतों एवं जैन समाज पर मढ़ना पूर्णतः अनुचित और भ्रामक है।

श्रीमती मेनका गांधी यदि वास्तव में जैन धर्म को समझना चाहती हैं तो उन्हें जैन आगम, शास्त्रों एवं आचार्यों का अध्ययन करना चाहिए तथा जैन संतों के सान्निध्य में रहकर जैन दर्शन की मूल भावना को समझना चाहिए। बिना तथ्य जाने इस प्रकार के सार्वजनिक बयान देना न केवल जैन समाज का अपमान है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है।

यदि पशु संरक्षण के प्रति उनकी वास्तविक चिंता है तो उन्हें उन अवैध तंत्रों और लोगों के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए जो वन्यजीवों की हत्या कर उनके अंगों का व्यापार करते हैं। साथ ही, उन्हें उन नीतियों और व्यवस्थाओं पर भी प्रश्न उठाना चाहिए जिनके कारण पशु संरक्षण प्रभावित होता है।

जैन समाज श्रीमती मेनका गांधी से अपेक्षा करता है कि वे अपने असत्य एवं भ्रामक वक्तव्य के लिए संपूर्ण जैन समाज से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त क्षमा याचना करें। अन्यथा जैन समाज आपको और भारतीय जनता पार्टी और आपको कभी माफ नहीं करेगा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

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