*साधु-साध्वियों के लिए बनाई गई सफेद पट्टी पर विवाद, जैन समाज में रोष*
*सेवा और श्रद्धा के कार्य को सांप्रदायिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण : अक्षय जैन*
इंदौर/मुंबई। मुंबई में जैन साधु-साध्वियों के विहार एवं आहारचर्या के दौरान भीषण गर्मी से राहत पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई सफेद पट्टी को लेकर खड़े हुए विवाद पर जैन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे श्रद्धा, सेवा और मानवीय संवेदना से जुड़े कार्य को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने का प्रयास बताया है।
इस मामले में श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षय जैन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और परोपकार का पर्याय है। जैन साधु-साध्वियां कठोर तप और संयमपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं तथा भीषण गर्मी में नंगे पांव विहार करते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं और सोसायटी के निवासियों द्वारा उनके चरणों को तपती जमीन से राहत देने के लिए की गई व्यवस्था को विवाद का विषय बनाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि विकृत मानसिकता का परिचायक भी है।
अक्षय जैन ने कहा कि यह कार्य किसी प्रकार के प्रदर्शन, दबाव या विशेषाधिकार की भावना से नहीं, बल्कि संतों के प्रति श्रद्धा और मानवीय संवेदना के कारण किया गया था। इसे सांप्रदायिक या राजनीतिक दृष्टि से देखने का प्रयास सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला है।
उन्होंने कहा कि जैन समाज सदैव सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करता आया है तथा कभी किसी की भावनाओं को आहत करने का पक्षधर नहीं रहा। इसके बावजूद सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर जैन साधु-साध्वियों तथा समाज के प्रति की गई अमर्यादित टिप्पणियां करोड़ों जैन अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं।
अक्षय जैन ने कहा कि सेवा, करुणा और श्रद्धा जैसे पवित्र भावों को विवाद का विषय बनाना भारतीय संस्कृति की सहिष्णु परंपरा के विपरीत है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि वे इस विषय को पूर्वाग्रह से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से देखें और धार्मिक सद्भाव एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने में सहयोग करें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जैन साधु-साध्वियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाले सेवा कार्य का विरोध करना किसी भी संवेदनशील समाज के लिए उचित नहीं कहा जा सकता। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन श्रद्धा और मानवीय संवेदना का उपहास नहीं होना चाहिए।”
जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने भी इस मामले में संयम, आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।






