मंत्री नहीं बन पाए लेकिन राजा की तरह सभी के दिलों पर राज किया !-अन्ना दुराई*

*मंत्री नहीं बन पाए लेकिन राजा की तरह सभी के दिलों पर राज किया !*

*-अन्ना दुराई*

भय ऐसा कि हर कोई मिलने से पहले झिझकता, उनसे बात करना हो तो पहले सभी उनका मूड देखते, तेवर ऐसे कि अच्छे अच्छे हिल जाते। इतना सबकुछ लेकिन हर शख्स को पता था कि बाबा दिल के बहुत अच्छे हैं। यही कारण था कि एक बड़ा वर्ग था जिनके लिए बाबा सदैव प्रिय रहे और वे सब बाबा के भी उतने ही प्रिय। जो उन्हें जानता और समझता था, उसे पता रहता कि बाबा के गुस्से में भी प्यार छुपा होता।

वाकई अश्विन जोशी ने राजनीति में अपनी खास पहचान बनाई। उनकी राजनीति का सबसे अहम पहलू रहा कि वे इस शहर के लिए सोचने वाले हर व्यक्ति के साथ समय बिताते। ऐसे समय जब राजनीति के रंग बदल गए, वे शहर हित में होने वाली चर्चाओं, गोष्ठियों में शामिल होते। अपनी राय भी रखते और दूसरों को सुनते भी। इससे हर विषय पर उनका एक निखरा व्यक्तित्व नजर आता। राजनीति के क्षेत्र में काम करते समय कई तरह की परिस्थितियाँ सामने आती है। कभी पक्ष तो कभी विपक्ष, लेकिन बाबा ने अपना जूझारूपन, आक्रामकता और निडरता वाला स्वभाव नहीं बदला। हमेशा उनकी धमक बरकरार रही।

बात तब की है जब कांग्रेस की राजनीति में उनका संघर्ष का दौर था। तब कांग्रेस में आसानी से पद प्रतिष्ठा मिलना आसान नहीं था। केंद्र में सरकार होने से पापा (कल्याण जैन, पूर्व सांसद) को इंदौर जिले की टेलीफ़ोन सलाहकार समिति के गठन का अवसर मिला। पापा ने इंदौर के 30 नामचीन जो सामाजिक, पत्रकारिता, राजनीति के क्षेत्र के धुरंधर रहे, को समिति में शामिल करा दिया। विरोधी दल के होने के बावजूद, अश्विन जोशी की अनुशंसा भी पापा ने की। तब इस समिति का बहुत महत्व हुआ करता था। वो दिन है, और जब तक सक्रिय रहे, बाबा इसका हमेशा उल्लेख करते रहे। वे कई बार सार्वजनिक रूप से कहते, जब मुझे मेरी पार्टी में कुछ नहीं मिला तब कल्याण दादा ने मुझे प्रतिनिधित्व दिया। हालाँकि बाद में बाबा तीन बार कांग्रेस से विधायक बने। मंत्री नहीं बन पाए लेकिन राजा की तरह अपने चाहने वालों और समर्थकों के दिलों पर राज किया।

पारिवारिक संबंध होने से, जब मेरी मुलाकात उनसे होती, मैं उन्हें सपरिवार घर आने का निमंत्रण देता। अकेले अकेले कई बार आए लेकिन पहले भाई पंकज जोशी और अब बाबा के चले जाने से, सबको साथ बुलाने की कसक रह गई। विनम्र श्रद्धाभाव….

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