*महासंघ एक बार फिर सवालों के चक्रव्यूह में फंसा*
इंदौर। महावीर जन्म कल्याणक रथयात्रा के आयोजन को लेकर श्वेतांबर जैन महासंघ एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मुद्दा आयोजन से जुड़े आर्थिक निर्णयों और पारदर्शिता का है, जिसे लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, रथयात्रा के संचालित झांकियां का कार्य एक इवेंट कंपनी को सौंपा गया था। अब समाजजन यह जानना चाह रहे हैं कि क्या इसके लिए महासंघ द्वारा कोई पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। यदि टेंडर आमंत्रित किए गए थे, तो उसमें किन-किन एजेंसियों ने भाग लिया और किस आधार पर चयन किया गया । इस पर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इसके साथ ही, आयोजन के दौरान संबंधित इवेंट कंपनी की ओर से कथित रूप से किए गए प्रचार-प्रसार (पब्लिसिटी) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। समाज के कुछ लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के मंच पर किसी निजी कंपनी स्वामी की ब्रांडिंग दिखाई देना उचित नहीं है, जब तक कि इसके लिए स्पष्ट अनुमति और नीति निर्धारित न हो।
समाज के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े धार्मिक आयोजनों में आर्थिक पारदर्शिता और प्रशासनिक स्पष्टता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि समाज में विश्वास बना रहे। वर्तमान स्थिति में जानकारी के अभाव ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
उधर, श्वेतांबर जैन महासंघ की ओर से इस पूरे मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में समाजजनों द्वारा महासंघ से स्पष्ट रूप से यह मांग की जा रही है कि टेंडर प्रक्रिया, चयन मानदंड और पब्लिसिटी से जुड़े नियमों पर शीघ्र स्पष्टीकरण दिया जाए।






