*राजबाड़ा में अतिक्रमण पर सख्ती से परेशान निगम का रिमूवल अमला! आदेश मानें तो ‘गांठ’ ढीली, न मानें तो नौकरी पर आंच*
*फुटपाथ कारोबारियों को लामबंद कर नेताओं की चौखट तक पहुंचाने की कवायद, आदेश पलटवाने की जुगत तेज*
इंदौर। राजबाड़ा और आसपास के बाजारों में सड़क व फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के सख्त आदेश के बाद नगर निगम का रिमूवल अमला ही सबसे ज्यादा असहज दिखाई दे रहा है। उच्च अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि सड़क और फुटपाथ पर किसी भी तरह का अतिक्रमण या कारोबार दिखाई नहीं देना चाहिए, लेकिन इस आदेश के पालन में ही कुछ कर्मचारियों को सबसे बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक वर्षों से फुटपाथ कारोबारियों के साथ बने समीकरण अब सख्ती के चलते टूटने की कगार पर हैं। ऐसे में आदेश का पालन करने पर पुरानी ‘गांठ’ खुलने का डर है, वहीं आदेश की अनदेखी करने पर नौकरी पर आंच आने का खतरा मंडरा रहा है। इसी दुविधा के बीच रिमूवल अमले के कुछ लोग पर्दे के पीछे से हालात बदलने की कोशिश में जुटे बताए जा रहे हैं।
बताया जाता है कि फुटपाथ कारोबारियों को फिर से लामबंद कर नेताओं की चौखट तक ले जाने की रणनीति बनाई जा रही है। उन्हें यह समझाया जा रहा है कि अगर सख्ती जारी रही तो उनके रोजगार पर संकट आ जाएगा, इसलिए वोट की ताकत दिखाकर दबाव बनाया जाए।
चर्चा यह भी है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जितनी पीड़ा फुटपाथ कारोबारियों को नहीं दे रही, उससे ज्यादा बेचैनी उन लोगों में है जिनके लिए फुटपाथ की बसावट कभी ‘लक्ष्मी के आगमन’ का जरिया बनी रहती थी। अब सवाल यह है कि राजबाड़ा में सख्ती का आदेश आखिर कब तक कायम रहता है या फिर दबाव की राजनीति के बीच इसे पलटने की कोशिश सफल होती है।






