*कभी मजदूर थीं अब सोलर लाइट बना रहीं महिलाएं*
रांची. ओरमांझी प्रखंड की 15 महिलाएं देश-दुनिया के लिए मिसाल बन गई हैं। कभी मजदूरी करने वाले ये हाथ मैकेनिक बन आज सोलर लाइट बना रहे हैं। ओरमांझी के मॉडल ट्रेनिंग सेंटर में मिली ट्रेनिंग के बूते सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी ये महिलाएं अब तक 2000 सोलर लाइट बना चुकी हैं।
दो कंपनियों से 30 हजार सोलर लाइट का ऑर्डर मिला है। इसमें 20 हजार सोलर लाइट का ऑर्डर टाटा स्टील कंपनी ने दिया है। एमओयू होना बाकी है। यह सब प्रशासन के सहयोग से संभव हुआ है। एक लाइट बनाने की लागत करीब 95 रुपए है। बाजार में कीमत 120 रुपए है। लाइट में लगने वाला ट्रांसफॉर्मर भी महिलाएं खुद ही बना रही हैं। एलईडी बल्ब, सोलर प्लेट और बॉडी हैदराबाद से मंगाए गए हैं। कैपेसिटर, ट्रांजिस्टर व रजिस्टेंस कोलकाता व दिल्ली से लाए गए हैं।
6 माह की गारंटी, टूटता भी नहीं, पानी के अंदर जलता है
यह लाइट ऊंचाई से गिरने पर भी नहीं टूटती। इसे वाटर प्रूफ भी बनाया गया है। ट्रेनर श्याम प्रजापति के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पानी में भी इस लाइट को लेकर चला जाए तो यह जलती रहेगी। छह महीने की गारंटी भी है। सोलर पैनल इस लाइट की बेस प्लेट पर लगा है। चार्ज करने के लिए इसे उलटकर किसी बोतल में रखा जा सकता है। 45 मिनट में एक लाइट बनती है। महिलाएं रोज 400 रु. कमा रहीं हैं।






