*ऑनलाइन डिस्काउंट से पुश्तैनी गारमेंट्स कारोबार संकट में*
*लोकल रिटेल संरक्षण नीति जरूरी, नहीं तो बढ़ेगा रोजगार संकट: अक्षय जैन*
इंदौर। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और बड़े ब्रांड्स की आक्रामक डिस्काउंट नीति ने शहर के छोटे-मझले गारमेंट्स व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि मौजूदा हालात में स्थानीय और पुश्तैनी रिटेल व्यवसाय असमान प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है। यदि समय रहते ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लिए गए, तो इसका सीधा असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अक्षय जैन ने बताया कि ऑनलाइन कंपनियां और मल्टीनेशनल ब्रांड भारी छूट का प्रचार कर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, जबकि स्थानीय व्यापारी सीमित पूंजी, बढ़ते किराये, बिजली बिल और टैक्स बोझ के बीच ईमानदारी से कारोबार कर रहा है। “यह मुकाबला कीमत का नहीं, बल्कि संसाधनों का हो गया है, जिसमें छोटा व्यापारी पीछे छूटता जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि इंदौर जैसे व्यापारिक शहर में गारमेंट्स रिटेल सेक्टर हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है। इसके बावजूद यह वर्ग नीतिगत उपेक्षा का शिकार है। एसोसिएशन की ओर से शासन को सुझाव भेजे गए हैं, जिनमें अनियंत्रित और भ्रामक डिस्काउंट पर नियंत्रण, लोकल रिटेल संरक्षण नीति लागू करने, डिजिटल सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षण व सब्सिडी तथा पारंपरिक बाजार क्षेत्रों में पार्किंग व अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की गई है।
अक्षय जैन ने कहा कि स्थानीय व्यापारी कीमत में नहीं, बल्कि भरोसे, सेवा और गुणवत्ता में प्रतिस्पर्धा करता है। “ग्राहक को सही सलाह, बेहतर फिटिंग और बिक्री के बाद की सेवा आज भी लोकल बाजार ही देता है। जरूरत है कि शासन और समाज दोनों मिलकर इस भरोसे को मजबूत करें,” उन्होंने कहा।
उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे खरीदारी में “लोकल से खरीदो” को प्राथमिकता दें। इससे न केवल स्थानीय व्यापार मजबूत होगा, बल्कि शहर की आर्थिक सेहत भी बेहतर बनी रहेगी और पुश्तैनी व्यवसायों की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ने का भरोसा मिलेगा।






