*जैन समाज में चिंतन हो : आस्था, आडंबर और आत्ममंथन*
✒️ *अक्षय जैन (नाकोड़ा)*
आज जैन समाज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है, जहाँ रास्ते तो अनेक हैं, पर सही दिशा चुनने का साहस दुर्लभ होता जा रहा है। एक तरफ महंगे चातुर्मास, भव्य धर्म सभाएँ, साधु-संतों का भव्य महिमामंडन, और दूसरी ओर साधारण साधर्मिक बंधुओं का मौन संघर्ष—रोज़गार की तलाश, आर्थिक असुरक्षा और उपेक्षित जीवन।
धर्म का मूल उद्देश्य आत्मशुद्धि और समाज-कल्याण रहा है। परंतु आज दान-धर्म की बड़ी राशि ऐसे आयोजनों में व्यय होती जा रही है, जहाँ धर्म कम और प्रदर्शन अधिक दिखाई देता है। चिंता का विषय यह नहीं कि उत्सव होते हैं, बल्कि यह है कि उन पैसों का बड़ा भाग गैर-जैनी उपभोग की वस्तुओं, आलीशान व्यवस्थाओं और अल्पकालिक दिखावे में बह जाता है, जबकि समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दीर्घकालिक सहारा नहीं मिल पाता।
जिनालय निर्माण आज प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा का विषय बन गया है। किस नगर में बड़ा मंदिर, किस समाज ने भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव किया—यह होड़ अब एक नई सामाजिक बीमारी बन चुकी है। मंदिर तो खड़े हो जाते हैं, परंतु उनमें जीवंत साधना कहाँ है? कई स्थानों पर भगवान की पूजा भी अब वैतनिक पुजारियों के भरोसे हो गई है, और समाज स्वयं केवल दर्शक बनकर रह गया है। देव-दर्शन रह गया है, देव-भक्ति कहीं पीछे छूट गई।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जैन समाज, जो “परस्परोपग्रहो जीवानाम्” का संदेश देता है, वह अपने ही साधर्मिक बंधुओं की आर्थिक उन्नति को संगठित अभियान का रूप नहीं दे पा रहा। शिक्षा, स्वरोज़गार, व्यापार में सहयोग, निर्धन परिवारों के लिए सम्मानजनक जीवन की योजनाएँ—ये सब बातें भाषणों में तो हैं, पर ज़मीनी स्तर पर बिखरी और कमजोर हैं।
समाज को अब यह निर्णय करना होगा कि हम मंदिरों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं या संस्कारों की गहराई? हम चकाचौंध भरे आयोजन चाहते हैं या आत्मनिर्भर साधर्मिक परिवार? क्योंकि यदि समाज का कमजोर वर्ग कमजोर ही रहा, तो भव्य मंदिर भी खोखले स्मारक बन जाएंगे।
अब समय है कि जैन समाज आत्ममंथन करे। धर्म को दिखावे से निकालकर सेवा का माध्यम बनाए। दान को प्रतिष्ठा का साधन नहीं, परिवर्तन का आधार बनाए। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त नहीं होगा, तब तक हमारा धर्म केवल अनुष्ठानों की भीड़ बनकर रह जाएगा, साधना का प्रकाश नहीं। *आलेख समाज की जागृति उद्देश्य भाव से लिखा है। इसे आप बिना शब्द बदलाव के फॉरवर्ड कीजियेगा ।*
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