महाकाल” प्रयोग के लिए नही है

“महाकाल” प्रयोग के लिए नही है,

महाकाल सवारी में प्रशासनिक निर्देशों में समन्वय का अभाव होने से महाकाल सवारी में असमंजस की स्थिति बनी।
पुलिस का आदेश अलग,मंदिर समिति का रूट प्लान अलग।
मुख्यमंत्री जी के गृह नगर में इतनी लचर प्रशासनिक होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
महाकाल मंदिर में इतर अनुभव का दंभ पालने वाले व्यवस्थापक न तो श्रद्धालुओं की भावना समझते है न सनातन कि परम्परा का उनको ज्ञान है। सवारी का अपना व्यकरण है उसे अराजक कौन कर रहा है।
पुलिस और प्रशासन में समन्वय ऊपरी लेवल पर दिखता है पर राजनीतिक नेतृव के सामने नम्बर बढ़ाने का लोभ संवरण सब कुछ बिगाड़ देता है।
उज्जैन परम्परा, आस्था और लोकविश्वास का शहर है,इसे इसी तरह चलाइए,अन्यथा महाकाल का अपना दंड विधान है उससे कोई नही बचा है।

प्रकाश त्रिवेदी

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