*नर्मदा जल के बंटवारे में म.प्र. के हितों की अनदेखी पर विरोध दर्ज*
इंदौर ।नर्मदा जल एवं उससे प्राप्त लाभों के बँटवारे के संबंध में मध्य प्रदेश के हितों की अनदेखी पर मध्य प्रदेश द्वारा आज विरोध दर्ज कराया गया है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा नर्मदा जल के बंटवारे हेतु सभी भागीदार राज्यों के हितों को सुरक्षित करते हुए अपने आदेश के परिपालन में क्रियान्वयन एवं नियत्रंण हेतु गठित सरदार सरोवर जलाशय रेग्युलेशन कमेटी द्वारा मध्यप्रदेश के हितो को अनदेखा किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश के साथ अन्याय हो रहा है।
मध्यप्रदेश राज्य के प्रतिनिधियों द्वारा राज्यों के लिये गठित समिति के न्यायाधिकरण के आदेश के परिप्रेक्ष्य में राज्यों के हितमें रखें जाने वाले पक्षों को सुना तो जाता है, लेकिन उन बिन्दुओं को कार्य विवरण में नजरअंदाज किया जाता है एवं उचित रूप से समाहित नहीं किया जाता है।
नर्मदा कछार में बने हुए विभिन्न वृहत बांधों-जैसे आर.एस.बी.एस,आई.एस.पी., ओ.एस.पी.एवं गुजरात राज्य में बने एस.एस.पी. के जलाश्यों से वाश्पी करण होना स्वाभाविक है, लेकिन समिति द्वारा इसको सिर्फ सरदार सरोवर जलाश्य के परिप्रेक्ष्य में ही रोका जाना उचित नहीं है। नहरों एवं जल विद्युत गृहों से निकलने वाले जल के मापन में होने वाली त्रुटिया केवल मध्यप्रदेश के जलाश्यों पर ही लागू किया जाना न्याया संगत नहीं होगा। ये त्रुटिया सरदार सरोवर बांध के जलाश्य से विभिन्न उपयोगों के लिए निकलने वाले जल मापन की मात्रा के लिये भी पा गई है।
नर्मदा जल एवं उस से प्राप्त लाभों के बंटवारे का निर्णय एन.डब्लू.डी.टी अवार्ड में किया गया है। अवार्ड में सभी राज्यों के हितों के संरक्षण की जवाबदारी एन.सी.ए. को सौपी गई है। नर्मदा जल के ऑंकलन एवं बंटवारे का कार्य एन.सी.ए. की बैठक में किया जाता है। इस संबंध में प्राधिकरण के इंदौर स्थित मुख्यालय में आज 18.07.2019 को सरदार सरोवर जलाशय विनियमन समिति की 61वीं बैठक आहुत की गई थी। बैठक में मध्यप्रदेश राज्य के प्रतिनिधियों ने मत व्यक्त किया कि इसके पूर्व की बैठकों में उनके द्वारा रखे गये पक्ष को नजर अंदाज करते हुए निर्णय लिया गया है। साथ ही उनके पक्ष को बैठक की कार्यवाही विवरण में उचित रूप से समाहित ही नहीं किया गया है। इससे मध्यप्रदेश के हित विपरीत प्रभावित हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश के प्रतिनिधियों द्वारा यह मांग की मध्यप्रदेश राज्य द्वारा पूर्व बैठक में गुजरात राज्य को वर्ष 2017-18 में आवंटित जल के अतिरिक्त उपयोग किये गये अंश को एन.डब्लू.डी.टी. अवार्ड के प्रावधान अनुसार आगामी वर्ष में समायोजित किया जावें। जिसे प्राधिकरण ने अमान्य किया गया, जिससे मध्यप्रदेश राज्य के हित विपरीत प्रभावित हुए। यह भी मांग की गई कि तय किये गये अनुसार आडियों रिकार्डिंग के आधार पर पूर्व में आहुत 59वीं एवं 60वीं बैठक के कार्यवाही विवरण को संशोधित कर सरकुलेट करने के उपरांत पुनः बैठक आयोजित की जावें। तथा प्राधिकरण द्वारा एजेण्डा के अगले बिन्दुओं पर चर्चा जारी रखने के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के प्रतिनिधियों द्वारा बैठक का बहिष्कार किया गया।
1298 views





