हरिवंश या शेषाद्री चारी : भारत का उपराष्ट्रपति कौन होगा
?
-अनिल त्यागी
भारत का उपराष्ट्रपति कौन? ये बहस चल रही है. सब ये जानने को उत्सुक हैं, कि भारतीय जनता पार्टी अपना उम्मीदवार किसको बनाएगी? प्रयास तो ये भी हो रहा है, की सब एक राय से हो जाए. यानी कि भारतीय जनता पार्टी एक नेता का नाम लें और सब उस पर अपनी मोहर लगा दें. लेकिन बदलती परिस्थितियों में इतना आसान नहीं है. आज जो हालात हैं उनमें जो सबसे तेजी से उभरता हुआ नाम है,राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का. हरिवंश पढ़े लिखे हैं. प्रभात खबर जैसे प्रसिद्ध अखबार के संपादक रहे हैं. धनबाद और झरिया की खानों से निकलते हुए काले हीरे यानी कि कोयला खदानों से वे बावस्ता रहे हैं. उनके अखबार के मालिक उषा मार्टिन के कर्ताधर्ता झावर परिवार प्रवर्तन निदेशालय की जांच के घेरे में है. 190 करोड़ रूपया तो एक छापे में ही निकला. हरिवंश क्रांतिकारी नेता जयप्रकाश नारायण के गांव सिताबदियारा के रहने वाले हैं. लेकिन जयप्रकाश नारायण जैसा तेज और संघर्ष का माद्दा उनमें नहीं है. हरिवंश पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर कि मीडिया सलाहकार भी रह चूके हैं, हरिवंश को मूलतः समाजवादी विचारधारा में माना जाता है. लेकिन अब उनका उस विचारधारा से कोई लेना देना है लगता नहीं। जब बिहार का बंटवारा हुआ झारखंड और बिहार अलग राज्य बने तब हरिवंश रांची छोड़ पटना आ गए और प्रभात खबर को नितीश कुमार की चरण वंदना में लगा दिया. तभी न राज्य सभा मिली । अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी हरिवंश को बिहार चुनाव के मद्दे नजर उपसभापति से राज्यसभा का सभापति बनाने का दाव चलती है या नहीं. बिहार के हिसाब से देखा जाए तो हरिवंश ठाकुर समुदाय से है लेकिन बिहार के ठाकुर वो मैं उनका कोई असर है, ऐसा लगता नहीं है. और बिहार में उनके सभापति बनने के बाद कोई वोटों का सैलाब आ जाएगा ऐसा भी नहीं लगता, लेकिन जहाँ युद्ध का लेवल दृष्टिकोण का हों उस जंग में सब कुछ संभव है. भारतीय जनता पार्टी अगर ये तय करती है की राष्ट्रीय दल बदल से ओतप्रोत किसी नेता को अब कोई संवैधानिक पद नहीं देना है तो हरिवंश का नाम संभवतः सामने नहीं आएगा.
बड़ी तेजी से एक नाम है चल रहा है संघ के ही ओर्गेनाइज़र अखबार के पूर्व संपादक शेषाद्री चारी का. शेषाद्री चारी मूलत: संघ के ही हैं. बहुत समय पहले जब संघ ने देश को चार महानगरों में बांटा था, तो शेषाद्री चारी मुंबई के इंचार्ज थे और मोहन भागवत जो की अब सरसंघचालक है नागपुर के इनचार्ज थे. शेषाद्री चारी बहुभाषी है, मराठी, अंग्रेजी, तमिल, हिंदी भाषाओ के बहुत बढ़िया जानकार हैं. देश विदेश के मामलों की बहुत गहरी समझ है. शेषाद्री चारी दक्षिण भारतीय हैं. तंजावुर के ब्राह्मण हैं. अब अगर दक्षिण भारत मैं भारतीय जनता पार्टी अपनी घुसपैठ देखना चाहती है तो शेषाद्री चारी से उपयुक्त कोई नाम संघ में दिखाई नहीं देता. सूत्रों की माने तो नरेंद्र मोदी भी उनको पसंद करते हैं . अब ऐसे में उनका इस पद पर आना थोड़ा कठिन दिखाई देता है, लेकिन संघ को ये तय करना है कि संवैधानिक पद पर अपने ही परिवार में दक्ष हुए व्यक्ति को ही राज्यसभा का सभापति बनाया जाए या नहीं.
हालांकि राजनाथ सिंह, नितिन गड़करी, थावर चंद गहलोत, मनोज सिन्हा, राम नाथ ठाकुर, शशि थरूर आरिफ मोहम्मद खान और गुलाम नबी आज़ाद का नाम भी लिया जा रहा है लेकिन तस्वीर अभी साफ नहीं हो रही. भारतीय जनता पार्टी को अध्यक्ष पद का नेता भी तय करना है. एक विचार ये भी हो रहा है कि जगत प्रकाश नड्डा को राज्यसभा का सभापति और मनोहर लाल खट्टर को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बना दिया जाए . यानी की एक ही बार में सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे. जिस भी नेता का चयन होगा लगता है उसका चयन केवल बिहार और केरल चुनाव की उपयोगिता ही देख कर होगा, मोदी शाह के लिए राजनीतिक दृष्टि से कार्यकर्ता की निष्ठा से कोई वास्ता नहीं है. चुनाव जितना ही उनका लक्ष्य है. सत्ता पहले है, निष्ठा को पारितोषिक दे कर सुलझाया जा सकता है. संघ को ये भी सोचना है कि क्या सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के चलते ही इन सब पदों पर मुहरों का चयन होगा या संघ अपने जीवन को न्यौछावर करने वाले कार्यकर्ताओं को भी स्थान मिलेगा. लेकिन क्या ऐसा होगा. शायद नहीं!
2144 views





