CJI का सवाल — जब ऊंचे पद तक पहुंच गए, तो फिर आरक्षण क्यों?

CJI का सवाल — जब ऊंचे पद तक पहुंच गए, तो फिर आरक्षण क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने आरक्षण नीति की मूल भावना पर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि SC/ST वर्ग के उच्च पदस्थ अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण का लाभ देना उचित नहीं, क्योंकि यह आरक्षण के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है।

CJI ने इसे अपनी न्यायिक सेवा के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताया — जहां सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST वर्ग में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू करने की मान्यता दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण वास्तव में उन्हीं को मिलना चाहिए जो सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित हैं, न कि उन्हें जो पहले ही आरक्षण का लाभ लेकर प्रशासनिक पदों पर पहुंच चुके हैं।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरक्षण का लाभ दोबारा उन्हीं परिवारों में चलते रहना, न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।

📌 CJI की यह टिप्पणी सामाजिक न्याय और आरक्षण की वर्तमान नीति पर गहरा मंथन है। यह संकेत देती है कि अब समय आ गया है जब आरक्षण की समीक्षा “योग्यता और वंचन” की कसौटी पर की जाए, न कि केवल जातिगत आधार पर।

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