कनाडा, अमेरिका और यूरोपीयन यूनियन ने दी मंकीपाक्स वैक्सीन को मंजूरी, डब्ल्यूएचओ ने दिया बड़ा बयान*
दुनियाभर में मंकीपाक्स के मामले बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इसके मामलों की संख्या 18000 को भी पार कर गई है। दुनिया के 78 देशोंमें सामने आने वाले इन मामलों से विश्व की चिंता भी बढ़ गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विश्व अब भी कोरोना महामारी से पूरी तरह से निजाद नहीं पा सका है।वैश्विक स्तर पर इसके मामलों में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस बीव डब्ल्यूएचओ ने विश्व स्तर पर कहा है कि फ्रंट लाइन वर्कर्स को इससे बचाव की वैक्सीन दी जानी चाहिए। इनमें हैल्थ सेक्टर से जुड़े कर्मी और हाई रिस्क वाले लोग शामिल हैं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये भी कहा है कि इस वैक्सीन को हर किसी को देने की कोई जरूरत नहीं है।डब्ल्यूएचओ प्रमुख का कहना है कि कनाडा, अमेरिका और यूरोपीयन यूनियन MVA-BN वैक्सीन जिसका इस्तेमाल चेचक या Smallpox में किया जाता है, को मंकीपाक्स के मरीजों को देने की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा दो और वैक्सीन को लेकर भी चर्चा की जा रही है। ये वैक्सीन LC16 और ACAM 2000 हैं। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से कहा है कि वो वैक्सीन की उपयोगिता को लेकर सही जानकारी मुहैया करवाएं। इससे वैश्विक स्तर पर मंकीपाक्स के बढ़ते मामलों को रोकने और इसके इलाज में भी मदद मिल सकेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने ये भी साफ कर दिया है कि इन वैक्सीन से संक्रमण की रफ्तार तुरंत कम हो जाएगी ऐसा नहीं होगा। न ही ऐसा होगा कि मरीज को देने से वो तुरंत ठीक हो जाएगा। इसमें कुछ समय लगेगा। ये समय कुछ दिनों से कुछ सप्ताह का भी हो सकता है






