पीपीई किट धोकर बेचने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण के वैज्ञानिक पर गिरी गाज, सस्पेंड
बड़खेरा इंडो वाटर बायो वेस्टेज प्लांट का मामला
सतना
जिले के बड़खेड़ा स्थित इंडो वाटर बायो वेस्टेज प्लांट में उपयोग की गई पीपीई किट नष्ट करने की बजाए धोकर बेचने के मामले का वीडियो बीते दिनों इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ था। इस मामले में जहां क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने भी निरीक्षण किया था। इसके पूर्व एसडीएम द्वारा मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया था लेकिन सभी टीम की जांच के बाद प्लांट संचालक को क्लीन चिट दे दी गई थी। वहीं इस मामले में राज्य सभा सदस्य व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था और कार्रवाई की अपील की थी। पूरे मामले में अब प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय प्रदूषण वैज्ञानिक राहुल तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई है। वैज्ञानिक राहुल तिवारी पर लापरवाही बरतने और समय पर निरीक्षण नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई है। वहीं अब तक अधिकारियों को प्लांट से पीपीई किट बाजार में बेचे जाने का पुख्ता सबूत नहीं मिला है।
कई बार शिकायतों के बाद नहीं हुई थी कार्रवाई-
शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर बड़खेरा पोस्ट भटनवारा जिला सतना में इंडो वाटर मैनेजमेंट एवं पॉल्यूशन कंट्रोल कारपोरेशन नाम से मालिक अमोल मोहने का प्लांट बस्ती में स्थित है। विगत वर्षों से प्लांट के लापरवाही पूर्वक संचालन की शिकायत संबंधित विभाग में की जा रही हैं लेकिन सुधार के नाम पर समय लेकर मामले को दबा दिया जाता है। आज तक कोई सुधार नहीं हो सका। वर्तमान में स्थिति बेहद चिंताजनक व खराब हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे 24 घंटे 7 दिन कचड़ा, धुंआ व दुर्गंध निकलती है। इस मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी जांच करने पहुंची थी लेकिन प्लांट प्रबंधन ने इस वीडियो को ही फर्जी और एक वर्ष पुराना बताकर जांच को रफा-दफा करवा दिया। इस प्लांट में आस-पास के छह से अधिक जिलों का बायो वेस्ट पहुंचता है जिसे डिस्पोज किया जाता है लेकिन पीपीई किट दोबारा धोकर बेचने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। इस मामले में लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से भी शिकायतें की थी जिसके बाद सीएमएचओ द्वारा प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई करने कहा गया था लेकिन इसके बाद भी विभाग ने कार्रवाई नहीं की। अब इस पूरे मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण वैज्ञानिक राहुल तिवारी की जिम्मेदारी बताते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है जबकि फैक्ट्री संचालक पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।






