बच्चों को इतना लायक भी ना बनाएं की वह आगे चलकर नालायक बन जाए
20वां संयम महोत्सव के दूसरे दिन राष्ट्रसंत के प्रवचन
जावरा निप्र “बच्चों को पढ़ाएं लिखाए आगे बढ़ाएं और लायक बनाए लेकिन इतने भी लायक न बनाएं की भी आगे चलकर वह नालायक बन जाए “
यह प्रवचन अहिंसा तीर्थ राष्ट्र संत स्वामी 108 श्री प्रमुख सागर जी ने विश्वा संयम महोत्सव के दूसरे दिन बी एल एम पैलेस पर धर्म सभा में कहे l
करीब 50 मिनट के प्रवचन में राष्ट्र संत ने कहा कि मां बाप ने बच्चों के लिए क्या नहीं किया इस प्रकार माता पिता अपने बच्चों को बुरा बनाने के लिए नहीं डाटते न दुत्कारते और ना मारपीट करते हैं लेकिन वह जो करते हैं बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए करते हैं lदुनिया में सबसे अमीर, वैभवशाली एवं ताकतवर कोई इंसान है तो वह है- जिसके मां बाप हैं क्योंकि जिनके पास मां-बाप की धरोहर है उनके पास शायद दुनिया की सबसे बड़ी धरोहर है दुनिया में अनेक लोग ऐसे हैं जिनका बचपन में साया उठ गया और वह अपने मां-बाप का चेहरा नहीं देख सके l मां- बाप बेटों की छत के समान है जिस भवन में छत नहीं है तो वह बेकार है भवन में चाहे मखमल ,कालीन हो और सोने की टेबल भी क्यों ना हो लेकिन मां-बाप रूपी छत नहीं तो वह भवन ( बच्चा )भी खंडहर के समान है जिन बच्चों को मां-बाप का साया नहीं मिलता वह बच्चा भूतिया महल के समान है और भूतिया महल में सिर्फ भूत रहते हैं l आपने फरमाया कि बचपन में बच्चे इस बात पर लड़ाई झगड़ा करते थे की मां मेरी है मां मेरी है वही बच्चे बड़े होकर मां तेरी है, मां तेरी है यह कहते और सुनाई देते हैं यदि घर में मां बीमार हो जाए तो बच्चे परवाह नहीं करते सोचो यदि मां के सामने बच्चा बीमार हो तो मां-बाप डॉक्टर ,नीम ,हकीम, और साधु संतों के पास उसे ठीक करने के जतन करते हैं और उसके ठीक होने तक काफी त्याग भी करते हैं लेकिन अमेरिका जैसे देश के दूषित वातावरण वातावरण के आगोश में आकर वर्तमान दौर दुकान , ऑफिस और मित्रों से फुर्सत नहीं होने का बहाना बनाकर उन्हें इलाज के लिए नौकरों के साथ भेज देते हैं आज भी भारतीय संस्कृति यह है कि यदि बच्चा कहीं दूर नौकरी या पढ़ाई के लिए रहता है तो मां- बाप यही बोलते हैं कि मैं बीमार हूं यह बेटी -बेटियों को मत बताना क्योंकि वह अपनी पढ़ाई या व्यापार में डिस्टर्ब हो जाएंगे लेकिन यह भी देखा जा रहा है कि बच्चे खुद मां-बाप का बोझ मानते हैं ऐसा नहीं है इसके विपरीत मां बाप बच्चों को अपना बोझ नहीं मानते यदि मां बाप बच्चों को नहीं चाहते तो कोख में ही मार देते या अनाथालय भेज देते l वे लोग धन्य है, सौभाग्यशाली हैं जिन्हें मां-बाप ने जन्म दिया मैं तो धन्य हूं की मैंने सांसारिक मोह त्याग कर मां बाप को छोड़ा लेकिन मैं जहां से निकलता हूं मुझे हर घर से मां- बाप ,भाई -बहन एवं सारे के सारे रिश्तेदार दिखाई देते हैं जावरा ऐसा बावरा हुआ है कि मैं शहर में जहां भी निकलता हूं मेरे दर्शन के लिए श्रावक लालायित रहते हैं l
मां के नाम की व्याख्या करते हुए आपने कहा कि जीवन में मां सब कुछ है मां बचपन से लेकर युवावस्था तक अनेक कष्ट झेलती है युवावस्था तक भी मां की भावना यह रहती है कि मेरे बेटे या बेटी ने कुछ खाया कि नहीं इसीलिए कहा गया है कि- ” “ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमां कहते हैं
जमीन पर जिसका अंत नहीं उसे मां कहते हैं “
मां सृष्टि की सबसे बड़ी भगवान है रामायण में भी राम को याद करने के पहले मां जानकी को याद किया जाता है l पुष्प वर्षा योग समिति के प्रवक्ता रितेश जैन ने बताया कि कार्यक्रम में राष्ट्रसंत के सांसारिक माता पिता बहिन एवं बहनोई का पुष्प वर्षायोग समिति जावरा के पदाधिकारियों ने केसरिया पगड़ी माला एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर बहू मान किया इसके पश्चात राष्ट्र संत ने उन्हें चांदी की पीछीं व कमंडल भेंट करते हुए घोषणा की कि मेरे सांसारिक माता पिता ( श्री आनंद बाबा एवं माता श्रीमती मिथिलेश माताजी ) सन 2021 मैं दीक्षा अंगीकार करेंगे l करतल ध्वनि के बीच की गई इस घोषणा के साथ ही आपने फरमाया कि यदि नेता का बेटा नेता बनता है तो संत का सांसारिक परिवार भी संत बनने की परंपरा को आगे क्यों नहीं बढ़ा सकता l मुंबई से पधारे श्रावक अतुल जैन एवं अंबाला से पधारे सुनील जैन एवं विनय जैन का भी मोती की माला , केसरिया पगड़ी एवं प्रतीक चिन्ह से राष्ट्रसंत ने सम्मान किया l
कार्यक्रम के दौरान अनेक परिवार के वरिष्ठ समाजजनों का पाद प्रक्षालन एवं बहूमान किया गया l सर्वप्रथम पाद प्रक्षालन का लाभ श्रीमती लीलाबाई ममताजी कोठारी ,शास्त्र भेंट का लाभ राजकुमार गोधा परिवार , पूजन अर्ग का लाभ श्रीमती रोशनबाई विजय औरा एडवोकेट एवं राष्ट्रसंत आचार्य श्री प्रमुखसागर जी की आरती का लाभ समाजसेवी कांतिलाल कियावत ने लिया l संचालन विजय औरा एडवोकेट एवं पुखराज सेठी ने किया l








