*मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: कमलनाथ ने अधिकारियों को चेताया*
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की जनता एक बार फिर से जनादेश देने को तैयार है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है और राज्य में 28 नवंबर को चुनाव होने हैं. एक ओर जहां बीजेपी 15 साल के राज को चौके में तब्दील करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस 15 साल के सूखे को खत्म करना चाहती है. यही वजह है कि दोनों ओर से रैलियों और बयानबाजियों का दौर अपने चरम पर है. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य में कुछ सरकारी कर्मचारियों का भाजपा से गुप्त लगाव है. साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर इन लोगों को ‘कोपभाजन’ बनने के लिए तैयार रहना चाहिए.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा, ‘कमलनाथ की चक्की चलती है देर से, पर बहुत बारीक पीसती है.’ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी भाजपा का समर्थन कर रहे हैं जो पिछले 15 साल से शासन में है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी आगाह करते हुए कहा कि उन्हें अपनी वर्दी का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘याद रखना, 11 के बाद 12 (12 दिसंबर) भी आता है.’ कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चौहान पर प्रहार करते हुए कहा कि नर्मदा और गंगा नदियों को साफ करने के बजाय उन्होंने बैंकों को साफ कर दिया.
मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को बड़ा मुकाबला बताते हुए कहा कि वह राज्य में अपनी पार्टी को सत्ता में लाने के लिए बेताब हैं. कांग्रेस पांच करोड़ मतदाता वाले इस विशाल राज्य में साल 2003 से सत्ता से बाहर है. भाजपा ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था. कांग्रेस सत्ता से भाजपा को हटाने के लिए तमाम कोशिश कर रही है और विधानसभा की 230 सीटों के लिए 28 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए आक्रामक प्रचार कर रही है. भाजपा ने राज्य में विधानसभा के अंतिम चुनाव में 44.88 प्रतिशत वोट के साथ 165 सीटें जीती थी जबकि 42.67 प्रतिशत वोट के साथ कांग्रेस को महज 58 सीटें मिली थी.
बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 230 सीटे हैं, जिनमें एससी के लिए आरक्षित सीटें- 35, एसटी के लिए आरक्षित सीटें- 47 हैं.
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