शरद पूर्णिमा में करें पूनम के चंदा का ध्यान – साध्वी निर्वाणश्री

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी के पावन सान्निध्य में शरद पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – शरद पूर्णिमा का बारह पूर्णिमाओं में विशेष महत्व है। चांद की ज्योतिर्मय शीतल किरणें आधि व्याधि का नाश करनेवाली है। अर्हम् के श्वेत रंग में न्यास विशेष भाग्यदायी हो सकता है। साध्वीश्री ने तेरापंथ परम्परा की हाजरी का वाचन एवं विश्लेषण करते हुए लेखपत्र का सामूहिक स्वर उच्चारण किया। तदनंतर अर्हं के न्यास का विशेष प्रयोग करवाया।
साध्वीश्री डा. योगक्षेमप्रज्ञाजी ने पांडव चरित्र का सरस व प्रेरक आख्यान सुनाते हुए सबको भावविभोर कर दिया। उन्होंने शरदपूर्णिमा का स्वास्थ्य एवं मन से क्या संबंध है, इसकी सुंदर व्याख्या की। साध्वीश्री ने कहा – शरद पूर्णिमा का चांद धरती से सर्वाधिक निकट रहता है। इसकी शीतल किरणों में औषधीय गुण रहते हैं। चंद्रमा का ध्यान करके हम विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
साध्वी लावण्यप्रभाजी ने मुख्य प्रवचन से पूर्व समता की महिमा प्रतिपादित करते हुए ‘सामायिक’ के संदर्भ में चर्चा की।
सभाध्यक्ष लक्ष्मणजी कोठारी ने जैन अल्पसंख्यक आयोग से जुड़े विकास जी आच्छा का स्वागत करते हुए आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। श्री विकास आच्छा ने अपने विचार व्यक्त किए।






