चरैवेति चरैवेति के जय घोष के साथ निकला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , इन्दौर विभाग का पथ संचलन

चरैवेति चरैवेति के जय घोष के साथ निकला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , इन्दौर विभाग का पथ संचलन

इन्दौर की 345 बस्तियों के प्रमुख मार्गों में एक लाख स्वयंसेवकों के कदमताल ने दिया एकत्व,अनुशासन व संगठन का संदेश

आज 25 अक्तूबर 2026 , रविवार को इन्दौर महानगर की गलियों में चरैवेति चरैवेती के संकल्प को हृदय में धारण कर राष्ट्र भक्ति के भाव से सराबोर स्वयंसेवक जब पथ संचलन में निकले तो महानगर का वातावरण स्व के गौरव से आच्छादित हो गया।

इस अवसर पर राऊ में समाज एवं स्वयंसेवको को संबोधित करते हुए मालवा प्रान्त प्रचारक श्री राजमोहन जी ने कहा कि स्वयंसेवकों को प्रण लेकर समाज में सभी प्रकार की विषमताओं का निवारण करके समरसता का भाव स्थापित करना है।

प्रान्त सह कार्यवाह श्री श्रीनाथ जी गुप्ता ने ओल्ड पलासिया में अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति परंपरा में विभेदो को विविधता के रूप में देखने और विविधता में एकात्मता का साक्षात्कार करने की क्षमता है , अतः भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सकता हैं।

इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इन्दौर विभाग का विजयादशमी के अवसर पर निकलने वाला पथ संचलन
बस्तीशः निकला।महानगर के चारों जिलों के 34 नगर की 345 बस्तियो के प्रमुख आंतरिक मार्गों से संचलन निकला जिसमें लगभग एक लाख स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। प्रत्येक संचलन का मार्ग 3 से 4 किमी रहा जिसमें स्वयंसेवकों संपूर्ण महानगर में लगभग 1200 किमी का मार्ग तय किया।स्थानीय रहवासियों ने उत्साहपूर्वक पूरे संचलन मार्ग में पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया।
संचलन के पूर्व सभी बस्तियों में एकत्रीकरण के स्थान पर स्वयंसेवकों ने व्यायाम योग किया तथा संघ के अधिकारियों का बौद्धिक उद्बोधन हुआ।इस अवसर पर समाज के प्रमुख जन उपस्थित रहे।
आगामी 28 नवंबर को इन्दौर विभाग का वृहत “चरैवेति एकत्रीकरण” सायं 4:30 से डेली कॉलेज में संघ शताब्दी वर्ष समापन कार्यक्रम के रूप में होगा।विगत एक माह से स्वयंसेवक इसकी तैयारी में जुटे हैं। यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल बैठक के आयोजन का गौरव इन्दौर को प्राप्त हुआ है जिसमें संपूर्ण भारत से संघ के सर्वोच्च अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
चरैवेति चरैवेति अर्थात निरंतर अपने ध्येय-पथ पर संकल्पित भाव से चलते रहना – यही बोध स्वयं में जागृत करके समग्र समाज को जागृत करना तथा भारत के परम वैभव को पुनः स्थापित करना। इस विराट संकल्प को लेकर स्वयंसेवक राष्ट्र प्रथम एवं राष्ट्र भक्ति का भाव ले नयी शताब्दी में प्रवेश करेंगे।

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