व्रतचेतना दिवस पर विशेष
तीर्थंकर चरित्र श्रवण का सार है – भावपरिवर्तन

चेम्बुर, 12.9.2026।पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन व्रतचेतना जागरण की प्रेरणा के साथ भगवान महावीर की दिव्य-भव्य जीवन झांकी प्रस्तुति की गई। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने ग्रैंड नालंदा सभागार में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा – भगवान महावीर का जीवन चरित्र आत्म विकास की प्रेरणा है। आलोक-दीप है। माता-पिता उन्हें संसार में बसाना चाहते थे और भ. महावीर महाव्रतों के महापथ पर बढ़ना चाहते थे। आखिर उन्होंने साधना पथ पर आगे बढ़ने से पूर्व माँ-पिता के आदेश को शिरोधार्य किया। 30 वर्ष के भरे यौवन में वे समस्त भौतिक सुविधाओं को अलविदा कर महापथ के राही बन गए।
प्रमुख साध्वीश्री डॉ. योगक्षेमप्रभाजी ने भगवान अरिष्टनेमि और वासुदेव श्रीकृष्ण से जुड़े रोचक व प्रेरक संस्मरणों की प्रस्तुति दी। आगमवाणी में दान, तप व वंदना आदि की महत्ता प्रस्तुत करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को भी भाव-भक्ति के लिए प्रेरणा दी।
साध्वी लावण्यप्रभाजी ने व्रत-चेतना जगाने की प्रेरणा देते हुए जीवन को नैतिक व प्रामाणिक बनाने पर जोर दिया। आज के कार्यक्रम में नगरसेविका आशा तोई ने दर्शन किए। साध्वी मधुरप्रभाजी ने व्रतों के दीप जलाने की प्रेरणा मधुर संगान से दी।
मंगलाचरण सामीनाका महिला मंडल ने अनुव्रत से सम्बद्ध गीत से किया। मंच संचालन पूर्व अध्यक्ष रमेश जी धोका ने किया। रात्रिकालीन कार्यक्रमों में हर दिन साध्वीश्री एवं साध्वीवृंद का प्रेरक प्रेरणा पाथेय तथा तेमम्मे, युवती बहनों, ज्ञानशाला, कन्यामंडल के ज्ञानवर्धक विविध उपक्रमों से प्रतिक्रमण के पश्चात सुचारू रूप से जनता लाभान्वित हो रही है। तेरापंथ के जैन जी एवं जैन अल्फा का साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी द्वारा विलक्षण कार्यक्रम अतीव प्रेरणादायी रहा।






