*ग्वालियर पुलिस का साइबर वार: लंबित प्रकरणों पर सख्ती, थाना प्रभारियों को मिला तकनीकी प्रशिक्षण*
ग्वालियर, 12 सितंबर। बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौती से निपटने के लिए ग्वालियर पुलिस ने कमर कस ली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह की अध्यक्षता में पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित बैठक में जिलेभर के थानों में अटकी पड़ी ई-एफआईआर और ई-जीरो एफआईआर की थानावार समीक्षा की गई। इस दौरान एसएसपी ने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि लंबित मामलों को अनदेखा करने की गुंजाइश नहीं है—हर थाने में विशेष टीमें बनाकर वांछित आरोपियों की तलाश तेज की जाए और मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा और शिवेश सिंह बघेल समेत सभी राजपत्रित अधिकारी और थाना प्रभारी मौजूद रहे। एसएसपी ने इस मौके पर एक अहम बात रेखांकित की—अपराध का चेहरा अब बदल चुका है, और पारंपरिक तरीकों से इसका मुकाबला संभव नहीं। तकनीक को हथियार बनाना अब पुलिसिंग की मजबूरी बन गई है।
बैठक के तुरंत बाद इसी विषय पर एक विशेष कार्यशाला भी आयोजित हुई, जिसमें हाईकोर्ट के अधिवक्ता और साइबर विशेषज्ञ डॉ. कुलभूषण यादव ने विवेचकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सीडीआर विश्लेषण, टावर लोकेशन ट्रैकिंग, आईपी एड्रेस और यूआरएल की पड़ताल, डिजिटल साक्ष्यों के संकलन तथा बैंकिंग डेटा की जांच जैसे तकनीकी पहलुओं को बारीकी से समझाया। साथ ही ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों, सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों और डिजिटल फॉरेंसिक की बारीकियों पर भी रोशनी डाली।
डॉ. यादव ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के दम पर ही आरोपियों तक पहुंचना और उन्हें अदालत में कठघरे तक लाना संभव हो पाता है। उनके अनुसार, वैज्ञानिक ढंग से जुटाए गए डिजिटल सबूत ही मजबूत विवेचना की नींव रखते हैं और अपराधियों को सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इस पहल को पुलिस महकमे में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है—अब लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं होगी, और तकनीक से लैस होकर ही अपराध पर नकेल कसी जाएगी।
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