*यूसीसी बिल : मध्यप्रदेश में अब सिर्फ एक शादी
लिव-इन के लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी*
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने आज जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए। सरकार ने आज यूसीसी बिल को मंजूरी दे दी है और अब इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
*हलाला पर रोक*
तलाक के बाद दोबारा शादी के नाम पर हलाला जैसी प्रथा को दंडनीय अपराध माना गया है।
*लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य*
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास लिव-इन रिलेशनशिप का बयान जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।
*लिव-इन से पैदा हुए बच्चे भी वैध माने जाएंगे*
लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है। बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।
*मोहन बोले – राम-रहीम के होंगे एक अधिकार*
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने संकल्प लिया है कि ऐसा कानून लागू किया जाए, जिसमें राम, रहीम, रवींद्र और रॉबिन सभी को समान अधिकार और समान न्याय मिले।
*एक ही शादी को मंजूरी*
यह कानून सभी समुदायों में केवल एक ही शादी को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है।
*शादी की उम्र कोई बदलाव नहीं*
विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है।
*तीन तलाक बोलकर तलाक नहीं*
अब मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधार पर ही होगा।
*गर्भावस्था के आधार पर सामान अधिकार*
अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।
*शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य*
एमपी के निवासियों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में एमपी ई-नगर पालिका पोर्टल और ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगरपालिका या पंचायत के जरिए यह प्रक्रिया पूरी होगा। रजिस्ट्रेशन न होने पर शादी अमान्य नहीं होगी लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माना होगा।
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