छोटे कारोबारियों को मुद्रा योजना के बावजूद नहीं मिल रहा सरकारी बैंकों से कर्ज!*

*छोटे कारोबारियों को मुद्रा योजना के बावजूद नहीं मिल रहा सरकारी बैंकों से कर्ज!*

स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (Small Industries Development Bank of India #sudbi ) की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे कारोबारियों (एमएसएमई) को कर्ज देने के मामले में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी पांच साल में 20 फीसदी घट गई है. दिसंबर 2013 में छोटे कारोबारियों के कर्ज का 69 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की थी. वहीं, दिसंबर 2018 में यह घटकर 46 फीसदी रह गई है. आपको बता दें कि छोटे कारोबारियों को मजबूती देने के इरादे से केंद्र सरकार ने मुद्रा और 59 मिनट में लोन जैसी योजनाएं शुरू कीं, लेकिन सरकारी बैंकों पर इसका खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है.

*क्या कहती हैं रिपोर्ट-* सिडबी की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, एनपीए (डूब हुआ कर्ज) बढ़ने के चलते सरकारी बैंकों लोन देने से कतरा रहे हैं. वहीं, प्राइवेट बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंसिंग कंपनियों ने इस मौका का फायदा उठाया है. ये छोटी कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज दे रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अभी कई सरकारी बैंकों को सुधार के लिए पीसीए फ्रेमवर्क में रखा गया है. इस फ्रेमवर्क में मौजूद बैंकों के ऑपरेशन पर कई तरह की पाबंदी होती है.ये सरकारी बैंक इससे बाहर आ जाएं तो स्थिति में सुधार हो सकता है.

>> दिसंबर 2013 में छोटे कारोबारियों के कर्ज में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी 22% थी.
>> यह दिसंबर 2018 में बढ़कर 33% हो गई.
>> पांच साल पहले छोटे कारोबारियों के कर्ज में एनबीएफसी की हिस्सेदारी 13% थी.
>> दिसंबर 2018 में यह बढ़कर 21% हो गई.

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