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लॉकडाउन में ग़रीबो की बस्ती उजाड़ने के मामले में आरटीआई की अवहेलना पर आयोग सख्त, निगम से शपथ पत्र में मांगा जवाब, कहा अब और समय नहीं दे सकते। रीवा नगर निगम आयुक्त ने देरी के लिए जताया खेद।*

*लॉकडाउन में ग़रीबो की बस्ती उजाड़ने के मामले में आरटीआई की अवहेलना पर आयोग सख्त, निगम से शपथ पत्र में मांगा जवाब, कहा अब और समय नहीं दे सकते। रीवा नगर निगम आयुक्त ने देरी के लिए जताया खेद।*

*लॉकडाउन के समय सौन्दर्यीकरण के नाम पर ग़रीबो की बस्ती उजाड़ कर उनको बेघर करने की कार्रवाई करने वाला रीवा नगर निगम प्रशासन विवादों में घिरता जा रहा है। अब राज्य सूचना आयोग ने एक और आदेश जारी कर के 48 घंटे के भीतर शपथ पत्र देकर आयोग के सामने पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि दोषी अधिकारियों से के खिलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है, उस पर भी यह बताएं कि क्यों न कार्रवाई की जाए।*

*राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने यह आदेश आवेदक शिवानंद द्विवेदी की अपील पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। यह आवेदन अधिनियम की धारा 7(1) के तहत दिया गया था जिसमें जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय होने की वजह से 48 घंटे के भीतर जानकारी मुहैया कराने की मांग की थी।*
*नगर निगम ने दस दिन का समय व्यतीत कर दिया लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। आवेदक को जो सूचनाएं मिली हैं उस पर असहमति व्यक्त की गई है। नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी टीबी सिंह को 22 मई को सुबह 11 बजे शपथ पत्र में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस मिलते ही नगर निगम में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। जिन अधिकारियों ने जानबूझकर गलत जानकारी मुहैया कराई थी उन पर भी कार्रवाई का खौफ बढऩे लगा है।*
*राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि 48 घंटे के भीतर दी जाने वाली जानकारी के लिए 216 घंटे से अधिक का समय लगा दिया फिर भी पूरी जानकारी नहीं दी। इसलिए शपथ पत्र में यह भी बताना होगा कि संपूर्ण जानकारी किस तारीख तक उपलब्ध करा दी जाएगी। आयोग की इस पर नोटिस पर विधि विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग ने पर्याप्त समय नगर निगम को दिया है अब सीधे कार्रवाई भी हो सकती है, बहाना अब नहीं बनाया जा सकता।*

*भ्रामक जानकारी देने से विवाद में आए*
*रतहरा तालाब से अतिक्रमण हटाने के मामले में शिवानंद द्विवेदी एवं संजय सिंह बघेल ने 48 घंटे के भीतर जानकारी चाही थी, जिसमें लॉकडाउन अवधि में अतिक्रमण हटाने की प्रमुख वजह और हटाए गए लोगों के भोजन एवं आवास की व्यवस्था का ब्यौरा चाहा था। इस पर निगम द्वारा जानकारी दी गई कि जोन क्रमांक चार में इस कार्रवाई की नस्ती तैयार नहीं की गई है। इसके बाद कहा गया कि कर्मचारियों की उपस्थिति कम होने के चलते सहायक लोक सूचना अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे। वहीं यह भी कहा गया कि संभागायुक्त के निर्देश पर कार्रवाई हुई थी। लगातार अलग-अलग सूचना देने के चलते आवेदकों ने आपत्ति जताई और आयोग के समक्ष अपील और शिकायत दोनों तरह के आवेदन लगाए गए। आयोग ने कहा है कि जानकारी भी उपलब्ध कराएं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी बताएं ताकि अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।*

*रीवा नगर निगम आयुक्त ने व्यस्तता का हवाला देकर जताया खेद*

इसके पहले आयोग ने नगर निगम के प्रभारी आयुक्त अर्पित वर्मा को नोटिस देकर 48 घंटे के भीतर जानकारी नहीं देने का कारण पूछा था। जिस पर वर्मा ने कहा है कि जिला पंचायत सीईओ के प्रभार के साथ ही कोरोना राहत का कार्य भी कर रहे हैं, इसलिए समय पर आवेदक को जवाब नहीं दे पाने पर खेद व्यक्त करते हैं

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