2015 से नहीं मिले बालश्री अवॉर्ड, 2016 का एग्जाम 2018 में हुआ

2015 से नहीं मिले बालश्री अवॉर्ड, 2016 का एग्जाम 2018 में हुआ
भोपाल । राष्ट्रीय बालश्री अवॉर्ड के लिए हर साल बच्चों का चयन तो कर लिया जाता है, लेकिन उन्हें अवार्ड दिया नहीं जा रहा है। इस वजह से बच्चों गहरी निराशा छाई हुई है। दरअसल मोदी सरकार इस मामले मेें पूरी तरह से लापरवाह बनी हुई है। इस मामले में लापरवाही की हद तो यह है कि पांच साल पहले के चयनित बच्चों को अब तक यह अवार्ड नहीं मिल सका है। बच्चों को हर साल दिलासा दी जाती है कि इस साल अवॉर्ड मिलेगा, लेकिन वह समय आने का नाम ही नहीं लेता है। हद तो यह है कि 2016 के बालश्री अवॉर्ड की लिस्ट 2019 में जारी की गई है, जिसमें भोपाल से तीन बच्चों का चयन हुआ है। इससे पहले भी कई बच्चों का चयन हो चुका है लेकिन अभी तक उन्हें पुरस्कृत नहीं किया गया है। बालश्री अवॉर्ड न प्रदान किए जाने का विरोध राष्ट्रीय बालश्री अवॉर्ड के विजेता बच्चों और अभिभावकों द्वारा कई बार किया गया और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र भी भेजा गया, लेकिन उसके बाद भी यह अवॉर्ड प्रदान नहीं किया जा रहा है।
1995 में शुरू हुई थी राष्ट्रीय बालश्री योजना
राष्ट्रीय बाल भवन ने 1995 में राष्ट्रीय बालश्री योजना की शुरुआत की थी। हर साल देश भर से 60 बच्चों को राष्ट्रीय बाल भवन दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बालश्री अवॉर्ड से नवाजा जाता है, लेकिन पांच साल से बच्चे चयनित हो जाने के बाद भी राष्ट्रीय बालश्री अवॉर्ड से वंचित हैं। भोपाल के भी कई बच्चे इस अवॉर्ड के लिए चयनित हो चुके हैं और इस अवॉर्ड को प्राप्त करने का इंतजार कर रहे हैं।
इस तरह होता है बालश्री पुरस्कार के लिए चयन
राष्ट्रीय बाल भवन दिल्ली क्रिएटिव फील्ड में बेहतर बच्चों को स्थानीय और जोनल लेवल पर अपने बाल भवन के माध्यम से चुनता है। इसके लिए देश को 6 जोन में बांटा गया है। चयनित बच्चों को दिल्ली भेजा जाता है। जहां उन्हें दिए गए, समय में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना होता है।
2015 में इनका हुआ था चयन
2015 में राष्ट्रीय स्तर पर बालश्री अवॉर्ड में नाटक एवं कठपुतली के लिए श्रेया खण्डेलवाल, कंठ संगीत के लिए साक्षी पंडोले, मूर्तिकला में आय सौंधिया, कविता के लिए आन्या केकरे, कविता के लिए मिराज फातिमा, गद्य के लिए ईशान भटनागर, विज्ञान परियोजना के लिए सोबी जैन, वैज्ञानिक नवीकरण के लिए तनिष्क सिंह राठौर, वैज्ञानिक नवीकरण के लिए शौर्यम जैन, विजुअल आर्ट के लिए नुपुर अग्रवाल का चयन किया गया था।
2016 में इनका हुआ था चयन
2016 में राष्ट्रीय स्तर पर बालश्री अवॉर्ड आर्ट क्राट के लिए विधि अहिरवार, विज्ञान परियोजना के लिए हर्ष कुमार जैन और वोकल म्यूजिक के लिए तान्या शर्मा को बालश्री अवॉर्ड से समानित किया जाना है।
दो साल बाद किया गया चयन
जवाहर बाल भवन के बालश्री अवॉर्ड के इंचार्ज नरेंद्र दांगी कहते हैं कि बालश्री चयन प्रक्रिया तीन साल लेट चल रही है। 2016 में होने वाले एग्जाम को 2018 में किया गया, जिसका रिजल्ट 2019 में आया है। इसमें भोपाल से 3 बच्चों का चयन हुआ है, लेकिन अवॉर्ड कब तक मिलेगा इसकी कोई जानकारी नहीं है।
एचआरडी मिनिस्टर को भेजा पत्र
बालश्री अवॉर्ड में चयन होने वाली साक्षी पंडोले के पिता रवि पांडोले ने बताया कि शास्त्रीय संगीत गायन में बालश्री अवॉर्ड के लिए चयन हुआ था और इसकी घोषणा भी की गई थी, लेकिन अभी तक अवॉर्ड नहीं दिया गया। इसके लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय बाल भवन दिल्ली, मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी लिखित रूप में पत्र भेजा है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।

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