मंदिरों में प्रवेश और पूजा नीतियां तय करना प्रशासन का काम, अदालतों का नहीं : सुप्रीम कोर्ट*
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिरों में प्रवेश और पूजा संबंधी नीतियां बनाने का अधिकार प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों का है, न कि अदालतों का। कोर्ट ने यह टिप्पणी उन मामलों में दी, जहां धार्मिक स्थलों में प्रवेश और पूजा नियमों को लेकर याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कोर्ट ने कहा कि अदालतें केवल कानून और संविधान के दायरे में हस्तक्षेप कर सकती हैं, लेकिन धार्मिक प्रथाओं और व्यवस्थाओं के संचालन में सीधे हस्तक्षेप करना न्यायिक सीमा से बाहर होगा।






