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बुरहानपुर के परंपरागत जलस्त्रोतों के संरक्षण की कार्ययोजना को अर्चना दीदी के प्रयासों से भारत सरकार की मिली मंजूरी*

*बुरहानपुर के परंपरागत जलस्त्रोतों के संरक्षण की कार्ययोजना को अर्चना दीदी के प्रयासों से भारत सरकार की मिली मंजूरी*
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश शासन की पूर्व महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के द्वारा बुरहानपुर में कुंडी भंडारा और कुओं व बावडि़यों के संरक्षण व सुधार कार्य के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी कड़ी में अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने बुरहानपुर के कुंडी भंडारा और कुओं व बावडि़यांे के संरक्षण की एक कार्ययोजना तैयार कर मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम एप्को के माध्यम से भारत सरकार की मंजूरी हेतु प्रेषित की गई थी। भारत सरकार के जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत नालेज सेंटर फार प्राइमेट चेंज द्वारा तैयार की गई इस योजना को आज गुरूवार 7 फरवरी 2019 को दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टीयरिंग कमेटी फार क्लाइमेट चेंज द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। श्रीमती चिटनिस इस बैठक को लेकर आज दिल्ली प्रवास पर हैं और उन्होंने आज की बैठक में योजना की स्वीकृति के लिए केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ हर्षवर्धन से अनुरोध कर योजना की स्वीकृति का आग्रह किया था जिसके परिणाम स्वरूप बुरहानपुर की इस योजना के लिए भारत सरकार ने 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री मा.नरेन्द्र मोदी जी एवं केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ.हर्षवर्धन को धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। श्रीमती चिटनिस ने बताया कि पानी का संरक्षण और भू-जल स्त्रोतों का संवर्धन उनके ह्रदया के निकट का विषय रहा है और इस योजना की स्वीकृति से वे भावविभोर हैं। इस योजना के अंतर्गत इंदौर जैसे बड़े स्थान के लिए भी 5 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है तब बुरहानपुर के लिए स्वीकृत 5 करोड़ की राशि का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। श्रीमती चिटनिस ने योजना की स्वीकृति और क्रियान्वयन के लिए बुरहानपुर नगर निगम के महापौर अनिल भोसले, नगर निगमाध्यक्ष मनोज तारवाला, सभी पार्षदगण और बुरहानपुर के निवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि बोरिंग करने के बजाएं कुआं जीवन भर साथ देता हैं। कुओं ने हमारा साथ नही छोड़ा वरन् हमने कुओं का साथ छोड़ा है। एक समय तक बोरिंग से पानी ले सकते हैं। बाद में बोरिंग का जल स्तर नीचे चले जाने से बोरिंग साथ छोड़ देती हैं। लेकिन कुएं से बिना बिजली के भी पानी निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि बोरिंग करने के बजाए कुओं को जीवित रखने पर कार्य करना चाहिए, क्योंकि एक समय तक बोरिंग साथ छोड़ सकती है, लेकिन कुआं कभी साथ ही छोड़ता। यदि कुएं में बारिश के पहले गहरीकरण करवा लिया जाए, तो कुएं का वाटर लेवल ओर बढ़ जाता हैं। कुएं होने से बहुत फायदे हैं। कुएं में वर्षा का पानी तो संग्रहण तो होता ही। इससे भूमिगत जल स्तर भी बढ़ता हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस द्वारा “कुएं ने कहा मुझसे“ अभियान भी संचालित किया जाता रहा है। इस अभियान के तहत “कुंए की मन बात“ से संबंधित बोर्ड लगाया गया जिसमें कुंए ने कहा मुझसेः-मैं पीढि़यों से आप की प्यास बुझा रही हूं,मैंने आपके दादा, पिता और आपके बच्चों की प्यास बुझाई है। इन सबसे मुझे बहुत प्यार मिला,इन सबके सुख-दुःख को मैंने देखा,महसूस किया और बांटा है। मैं जिंदा रहना चाहती हूं, आपके काम आना चाहती हूं। आप से विनती है कि मेरे आस-पास सफाई रखें, मैं कुआं हूं, कचरे का डिब्बा नहीं। समाज चिंता कर मुझे संभालता था। आप मुझे संभाले, मैं आप को संभालुंगी। आपके बुजुर्ग जूते-चप्पल पहनकर मेरे पास तक नहीं आते थे। मैं आप को याद दिला दूं अपने देश में तीज त्यौहारों पर मुझे पूजने की परंपरा युगों से रही है। आज भले ही न पूजें पर मुझे जिंदा तो रहने दे। “इस तरह कुएं की मन की बात“ बताने वाला बोर्ड कुओं के पास लगाया गया था। साथ ही कुएं के आसपास इमली, नींबू,जामुन,सुरजना एवं बेल के पौधे मटका टिम्बक पद्धति से लगाए गए थे। बता कि पिछले 10 वर्षों में श्रीमती चिटनिस द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में 400 से अधिक वर्षों पुराने पाय-बावडि़यों एवं कुओं का उपसा,सौंदर्यीकरण एवं विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें पुर्नजीवित किया गया है। उन्होंने कहा कि कुआं बहुत वैज्ञानिक है,कुआं बहुत दीर्यायु है,कुआं पीढि़यों तक साथ देती है, कुएं ने हमारा साथ नहीं छोड़ा बल्कि हमने कुओं का साथ छोड़ा है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के लिए लोगों में जागरूकता लानी होगी। इसके अलावा लोगों को अपने घरों-भवनों में प्रूफ वाटर हार्वेसिं्टग बनाने के लिए कार्य करने की जरूरत हैं। आने वाले भविष्य की चिंता करके हमें बारिश के पानी को सहजना होगा।
उल्लेखनीय है कि श्रीमती चिटनिस द्वारा वार्डों-गांवों में कुओं का गहरीकरण, जल स्त्रोतों के आसपास साफ-सफाई, नलों में टोटियां लगाने हेतु जलजागरण अभियान सहित अन्य विषयों पर कार्य किए जाते रहे है।
ज्ञात हो कि नेतृत्व की पहल पर जनता की भागीदारी से बुरहानपुर का भूजल-स्तर सुधरा है। यदि इच्छाशक्ति हो तो राजनैतिक नेतृत्व जनता को साथ लेकर अपने शहर को स्वर्ग जैसा बना सकते हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने राजनेताओं के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला पिछले डेढ़ दशक से पानी का संकट झेल रहा है। 3 दशक पहले भूमिगत जल जो 300 फीट पर उपलब्ध था, 800 फीट तक नीचे चला गया था। श्रीमती चिटनिस ने जल-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया। श्रीमती चिटनिस द्वारा घूम-घूम कर जल उपयोग दक्षता जैसे खेत कुंआ, नलों में टोंटी, बरसात के पानी को रोकने, कुंओं की सफाई, तालाबों का गहरीकरण, कम पानी वाली फसल की खेती और पानी को रिचार्ज करने की सलाह किसानों और आम लोगों को दी जाती हैं।
पहले पानी को लेकर स्थानीय लोगों में मारपीट तक की नौबत आ जाती थी। पानी के अभाव में किसान अपनी जमीन कौडि़यों के मेल बेचकर पलायन कर रहे थे। लेकिन अब जिन किसानों के खेतों में पानी नहीं था, अब उनकी जमीन हरी-भरी दिखने लगी है। उनके इस अभियान से ठंडी पड़ गई जिले की प्रमुख फसल केले की खेती में फिर से उछाल आया है। सिंचाई 560 हेक्टेयर से बढ़कर 1800 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। एक से देड़ लाख रुपए प्रति एकड़ बिकने वाली जमीन की कीमत अब 10 लाख रुपए एकड़ हो गई है।